रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर!डॉलर के मुकाबले 25 पैसे टूटकर 95.75 पर पहुंचा

भारतीय रुपए में लगातार कमजोरी का दौर जारी है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 पैसे टूटकर 95.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 95.50 के ऑल टाइम लो पर बंद हुआ था। लगातार गिरावट से बाजार में चिंता बढ़ गई है और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।
साल 2026 में लगातार दबाव में रुपया
साल 2026 की शुरुआत से ही रुपए में कमजोरी बनी हुई है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था और अब यह तेजी से गिरते हुए 95.75 तक पहुंच चुका है। रुपए में गिरावट का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, गोल्ड और आयातित सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा दबाव
रुपए की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक उछाल आ चुका है। इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर हो रहा है।
कच्चा तेल 105 डॉलर के पार
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपए पर पड़ रहा है।
विदेशी निवेशक निकाल रहे पैसा
ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के बीच विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है जिससे रुपए पर और दबाव बन रहा है।
डॉलर बना दुनिया का सबसे सुरक्षित विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कड़े रुख और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा अमेरिकी डॉलर पर बढ़ा है। ग्लोबल संकट के समय डॉलर को सुरक्षित निवेश माना जाता है जिसकी वजह से दुनिया भर की करेंसी दबाव में हैं।
व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा
तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ रहा है। इससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो रुपए में और कमजोरी आ सकती है।
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OPEC और JP जेपी मॉर्गन की चेतावनी
रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक अप्रैल में OPEC देशों का तेल उत्पादन पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर रहा। वहीं सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सप्लाई बाधित रहने पर बाजार सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है। वहीं जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलने के बाद भी इस साल कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रह सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने की थी अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची कम करने और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने को कहा था।
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सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क
सरकार ने मंगलवार रात कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला भी लिया है ताकि डॉलर के बाहर जाने की रफ्तार को कम किया जा सके। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल हालात जल्द नहीं सुधरे तो रुपए में आगे और गिरावट देखने को मिल सकती है।












