Union Cabinet Decisions:केंद्रीय कैबिनेट के बड़े फैसले, जानिए किन फसलों पर बढ़ा एमएसपी

कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में एमएसपी बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया। धान का MSP 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। सरकार ने कोयले को गैस में बदलने की योजना पर भी जोर दिया है। इन फैसलों से कृषि और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य है।
खरीफ फसलों की MSP में बढ़ोतरी
केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। धान का MSP 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के उद्देश्य से लिया गया है। एमएसपी बढ़ने किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि MSP तय करने का आधार लागत पर 50 प्रतिशत या उससे अधिक मुनाफा देना है। सरकार इस फॉर्मूले को 2019 से लागू कर रही है और उसी के तहत नए MSP तय किए गए हैं। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का दावा है कि इस नीति से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने में मदद मिलेगी।
किस फसल में कितनी बढ़ोतरी ?
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सूरजमुखी बीज पर सबसे ज्यादा एमएसपी बढ़ाई गई है। सूरजमुखी बीज में 622 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी बढ़ाई गई है। इसके बाद कपास में 557 रुपये, नाइजरसीड में 515 रुपये और तिल में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मुनाफे के लिहाज से मूंग में 61 प्रतिशत, बाजरा और मक्का में 56 प्रतिशत और अरहर में 54 प्रतिशत तक लाभ का अनुमान लगाया गया है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
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किसानों के लिए MSP में इजाफा
सरकार का अनुमान है कि MSP में इस बढ़ोतरी से किसानों को कुल मिलाकर लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसानों की आय बढ़ने के साथ उनको फसल का उचित दाम मिलेगा।
कोयला गैसीकरण योजना को बढ़ावा
ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने कोयला गैसीकरण योजना को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके तहत कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदलकर उपयोग किया जाएगा। इस गैस का इस्तेमाल खाद बनाने, बिजली उत्पादन और औद्योगिक केमिकल तैयार करने में किया जाएगा। इससे पर्यावरण को कम नुकसान होगा और आयात पर निर्भरता भी घटेगी।












