पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर पाकिस्तान में होने वाली अहम बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है तो अमेरिका ईरान पर फिर से कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए उन्होंने तेहरान को 24 घंटे की मोहलत दी है।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने युद्धपोतों को फिर से अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ये अब तक के सबसे ताकतवर हथियार हैं और जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका बिना हिचकिचाहट के सख्त कदम उठाएगा।
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ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी ईरान को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि ईरान के पास अब कोई खास ताकत नहीं बची है और वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में ईरान बातचीत के लिए मजबूर है।
इसी बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली अहम बातचीत के लिए रवाना हो चुके हैं। रवाना होने से पहले वेंस ने उम्मीद जताई कि बातचीत सकारात्मक होगी, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ईरान ने किसी तरह की चालबाजी की, तो अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा।
ईरान की तरफ से भी कड़ा रुख सामने आया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घलिबाफ ने कहा है कि बातचीत से पहले कुछ अहम मुद्दों का समाधान जरूरी है। उन्होंने लेबनान से जुड़े मामलों को सुलझाने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि इन शर्तों के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। युद्ध से पहले यहां से रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 12 रह गई है। इससे ग्लोबल तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरान इस जलमार्ग से तेल की सप्लाई को बाधित कर रहा है, जो समझौते के खिलाफ है।
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यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अस्थायी युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच संघर्ष जारी है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। अगर समझौता होता है तो हालात सुधर सकते हैं लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।