T20 world Cup :हार पर हाहाकार, अक्षर पटेल को नहीं खिलाने पर हंगामा, वाशिंगटन सुंदर के चयन पर सवाल

स्पोर्ट्स डेस्क। T20 World Cup 2026 के सुपर-8 मुकाबले में भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली बड़ी हार सिर्फ स्कोरलाइन तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम चयन को लेकर बहस का तूफान भी खड़ा कर गई। रविवार के मैच में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया बिखरती नजर आई। लेकिन अब असली चर्चा उस फैसले पर छिड़ी, जिसमें उप-कप्तान अक्षर को अंतिम एकादश से बाहर रखा गया।
अनुभव की अनदेखी पर उठी आवाज
एक टीवी कार्यक्रम में सीनियर क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह ने अक्षर पटेल को नहीं खिलाए जाने पर सवाल उठाए। सहवाग ने कहा कि यह समझ से परे है कि आप अपने बेस्ट बॉलर को प्लेइंग इलेवन में नहीं रख रहे। सामने राइट हैंडर होगा या लेफ्ट हैंडर यह मायने नहीं रखता, लेकिन बेस्ट बॉलर टीम में होना था। हरभजन सिंह ने भी कहा कि मेरे कॅरियर में अगर 150 विकेट लिए हैं तो 130 तो राइट हैंडर रहे। अगर आज के समय जैसे चयन होता तो हम एक-दो साल से ज्यादा नहीं खेल पाते।
अश्विन बोले- भरोसेमंद ऑलराउंडर हैं अक्षर
पूर्व भारतीय स्पिनर आर. अश्विन ने इस चयन को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके मुताबिक, टी20 प्रारूप में अक्षर पटेल ने बार-बार खुद को टीम का सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर साबित किया है। ऐसे खिलाड़ी को बाहर रखना केवल एक सामरिक प्रयोग नहीं, बल्कि टीम की स्थिरता के साथ जोखिम लेने जैसा कदम है।
पुरानी साझेदारी बनी तर्क का आधार
अश्विन ने याद दिलाया कि पिछले मुकाबले में जब भारतीय बल्लेबाजी दबाव में थी, तब अक्षर पटेल ने विराट कोहली के साथ मिलकर टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया था। यह साझेदारी केवल रन जोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि टीम को संकट से निकालने की मिसाल भी थी। ऐसे में उनका बाहर होना कई क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर गया।
टीम मैनेजमेंट का अलग नजरिया
दूसरी ओर, सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने इस फैसले को परिस्थितियों के अनुरूप बताया। उनका कहना था कि वाशिंगटन सुंदर पावरप्ले में गेंदबाजी और बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ बेहतर विकल्प हो सकते थे। हालांकि मैच में यह प्रयोग खास असर नहीं दिखा सका, जिससे चयन की रणनीति पर सवाल और गहरे हो गए। सुंदर केवल दो ओवर किए, बैटिंग में उन्होंने 11 बॉल पर 11 रन बनाए।
आगे का रास्ता बना चुनौती
इस हार ने टीम इंडिया को एक अहम मोड़ पर ला खड़ा किया है। मध्य ओवरों में संतुलन की कमी साफ दिखाई दी, जहां एक भरोसेमंद ऑलराउंडर की जरूरत महसूस हुई। अब सुपर-8 के बचे मुकाबले भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। टीम प्रबंधन को तय करना होगा कि क्या रणनीतिक प्रयोग जारी रखे जाएं या अनुभव और संतुलन के साथ नई दिशा तय की जाए।












