भोपाल। राजधानी में जहां स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की शुरुआत 10 अप्रैल से सिटीजन फीडबैक के साथ होने जा रही है। ऐसे में आधे शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी होने से चिंता बढग गई है। यह खुलासा नगर निगम का हालिया अंदरूनी सर्वे कर रहा है। सर्वे में सामने आया कि सफाई मामले में 21 में से 11 जोन की स्थिति बेहद खराब है। हैरानी की बात ये है कि आयुक्त के निर्देश के बाद भी इन जोनों के प्रभारी एएचओ समय पर फील्ड में ही नहीं पहुंच रहे।
दरअसल स्वच्छता सर्वे के मद्देनजर आयुक्त ने सभी एएचओ को सुबह 6 बजे से फील्ड में उतरने के निर्देश दिए थे। बावजूद कई प्रभारी एएचओ सुबह 8 बजे के बाद ही मैदान में पहुंच रहे हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था कागजों तक सीमित नजर आ रही है। न तो वक्त पर सफाई हो रही है और न ही कचरा उठ रहा है।
स्वच्छ सर्वेक्षण का यह चरण 45 दिनों तक चलेगा। 10 अप्रैल से सिटीजन फीडबैक शुरू होगा, जबकि 16 अप्रैल से 31 मई तक केंद्र सरकार की टीमें भोपाल आकर ग्राउंड पर सफाई व्यवस्था का मूल्यांकन करेंगी। लेकिन मौजूदा हालात में शहर की स्थिति बीते साल से भी खराब बताई जा रही है। शहर में मेट्रो, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के प्रोजेक्ट्स के कारण सड़कों पर धूल का गुबार है, वहीं अंदरूनी इलाकों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही।
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निगम के सर्वे में जोन 1, 2, 4, 5, 8, 9, 10, 11, 12, 14, 15, 17 और 19 की स्थिति सबसे खराब मिली है। इन जोनों के वार्डों में कचरा प्रबंधन, सड़क सफाई और डोर-टू-डोर कलेक्शन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जानकारी के मुताबिक इन क्षेत्रों में प्रभारी एएचओ लंबे समय से एक ही जगह जमे हुए हैं और पुराने तरीके से काम कर रहे हैं।
नगर निगम ने करीब चार महीने पहले प्रभारी एएचओ की व्यवस्था खत्म कर नई जिम्मेदारी तय करने की योजना बनाई थी, लेकिन कंसल्टेंसी एजेंसियों ने इन जोनों के काम को बेहतर बताया था। अब जब वास्तविक स्थिति सामने आई, तो 11 प्रभारी एएचओ को बदलने की तैयारी फिर शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि कई प्रभारी 7 से 10 साल से एक ही जोन में पदस्थ हैं, जिससे सिस्टम में जड़ता आ गई है।
निगम सूत्रों के मुताबिक कई जोनों में प्रभारी एएचओ खुद फील्ड में कम और कर्मचारी ज्यादा सक्रिय हैं। कहीं प्रभारी ने अपने ही कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंप रखी है, तो कहीं जोन की गाड़ी का निजी उपयोग किया जा रहा है। ज्यादातर फील्ड स्टाफ फोर्थ क्लास कर्मचारी हैं, जिनमें सफाईकर्मी से लेकर अतिक्रमण दस्ते के सिपाही तक शामिल हैं।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए जहां शहरों में विशेष अभियान चलाए जाते हैं, वहीं भोपाल में तैयारी अधूरी नजर आ रही है। अब देखना होगा कि सिटीजन फीडबैक और केंद्रीय टीमों के दौरे से पहले निगम व्यवस्था सुधार पाता है या फिर इस बार भी रैंकिंग में पिछड़ जाता है।