Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
धर्म डेस्क। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने वाला है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे ज्योतिष में कंकण सूर्य ग्रहण या खगोल विज्ञान में Annular Solar Eclipse / रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आकर सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा। सूर्य का बीच का हिस्सा ढका रहेगा और किनारों पर चमकदार अंगूठी जैसी आकृति दिखाई देगी।
भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, 2026 को दोपहर 3:56 बजे शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। यह दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अर्जेंटीना और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है। चंद्रमा के छोटे आकार के कारण यह सूर्य के मध्य भाग को ही ढक पाता है, जबकि सूर्य के किनारे खुलकर दिखाई देते हैं। इससे आसमान में ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य उत्पन्न होता है। खगोलविद इसे एक अद्भुत खगोलीय नजारा मानते हैं।
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले से सूतक काल शुरू होता है। इस दौरान पूजा-पाठ, मंदिर दर्शन और खाने-पीने की चीजें वर्जित होती हैं। लेकिन सूतक काल तब मान्य होता है जब ग्रहण देश में दिखाई दे। 17 फरवरी का यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए भारत में इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
वैज्ञानिक दृष्टि: वलयाकार सूर्य ग्रहण चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी की अद्भुत परस्पर स्थिति को दर्शाता है। यह खगोलविदों और खगोल शौकीनों के लिए महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है।
धार्मिक दृष्टि: हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को खास महत्व दिया जाता है। ग्रहण के दौरान पूजा, व्रत और कुछ अनुष्ठानों को ग्रहण के समय से जोड़ा जाता है। लेकिन चूंकि 17 फरवरी का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव नहीं होगा।
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण निम्नलिखित क्षेत्रों में दृश्य होगा-
दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी अर्जेंटीना, अंटार्कटिका, बोत्सवाना, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र, चिली, कोमोरोस, इस्वातिनी, फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र, लेसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मोजाम्बिक, नामीबिया, रियूनियन आईलैंड्स, दक्षिणी जॉर्जिया/सैंडविच आईलैंड्स, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बॉब्वे।
पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी
वलयाकार, भारत में नहीं दिखाई देगा।
पहला चंद्र ग्रहण- 3 मार्च 2026
यह ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है और भारत सहित एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय समयानुसार इसका सूतक काल मान्य रहेगा। इस दौरान आंशिक रूप से चंद्रमा का भाग पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा।
दूसरा सूर्य ग्रहण- 12 अगस्त 2026
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि, भारत में उस समय रात होने के कारण यह दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण यूरोप, आर्कटिक, ग्रीनलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल में देखा जा सकेगा।
दूसरा चंद्र ग्रहण- 28 अगस्त 2026
इस चंद्र ग्रहण को भारत से नहीं देखा जा सकेगा। यह मुख्य रूप से उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
इस प्रकार 2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे, जिनमें 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण शामिल हैं।