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सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे में मांसाहार पर रोक जारी रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार

सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे में नॉनवेज और अंडों पर लगी रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया और दो महीने में सुनवाई पूरी करने को कहा।
सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे में मांसाहार पर रोक जारी रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार

गुजरात के सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री और तैयारी पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के 500 मीटर के दायरे में नॉनवेज और अंडों पर प्रतिबंध लगाने वाले गुजरात हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट से इस मामले में लंबित अपीलों का जल्द निपटारा करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से संभव हो तो दो महीने के भीतर फैसला सुनाने का अनुरोध किया है। यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ के सामने आया। याचिका भोजनालय संचालकों की ओर से दायर की गई थी। इनमें ताज रेस्टोरेंट के मालिक आकिब अमीनभाई खान भी शामिल हैं।

10 अगस्त को जिला मजिस्ट्रेट ने लगाया था प्रतिबंध

दरअसल, गिर सोमनाथ के जिला मजिस्ट्रेट ने 10 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन और अंडों की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर रोक लगा दी थी। यह आदेश गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 33(1)(w)(ii) और धारा 33(6) के तहत जारी किया गया था। इसके तहत प्रभास पाटन, तालुका वेरावल के निर्धारित मार्गों और क्षेत्रों में यह पाबंदी लागू की गई। प्रभावित भोजनालय संचालकों ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने रद्द किया था आदेश

30 अक्टूबर को गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने जिला मजिस्ट्रेट की अधिसूचना रद्द कर दी थी। कोर्ट ने माना था कि इस तरह का प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिले व्यापार और व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। साथ ही, इसे संबंधित प्रावधानों के तहत अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया था। हालांकि, इसी दिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी। एक्टिंग चीफ जस्टिस मानस रंजन पाठक और जस्टिस निर्जर एस. देसाई की पीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई होने तक 10 अगस्त की अधिसूचना लागू रहेगी। हाईकोर्ट ने यह फैसला दीपावली और गुजराती नववर्ष के दौरान सोमनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए दिया था।

रेस्टोरेंट मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ भोजनालय संचालक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत इस तरह का स्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि खान-पान की आदतों को कानून के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता और किसी व्यक्ति को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि वह क्या खाए या क्या नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित रेस्टोरेंट संचालक पिछले 35 से 40 वर्षों से वैध रूप से शाकाहारी और मांसाहारी भोजनालय चला रहे हैं। सुनवाई के दौरान अहमदी ने कहा कि त्योहारों के समय इस प्रतिबंध से रेस्टोरेंट संचालकों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। उन्होंने दलील दी कि अगर कोई व्यक्ति बंद जगह के अंदर मांसाहारी भोजन करता है, तो इसमें गलत क्या है।

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गुजरात सरकार ने प्रतिबंध का किया समर्थन

गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने प्रतिबंध का समर्थन करते हुए कहा कि मांसाहारी भोजन बाहर परोसा जा सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि वह लंबित अपीलों पर जल्द सुनवाई करे और संभव हो तो दो महीने के भीतर फैसला दे।

सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित रास्ता निकालने की कही बात

सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में शायद संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि दोनों पक्षों के बीच कोई बीच का रास्ता निकाला जाए। हालांकि, पीठ ने इस पर फिलहाल कोई अंतिम राय नहीं दी। जस्टिस सुंदरेश ने सबरीमाला मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 की व्याख्या को लेकर 9 जजों की पीठ का आने वाला फैसला इस मामले पर असर डाल सकता है। उनके मुताबिक, उस फैसले के बाद इस तरह की दलीलों की जरूरत शायद न पड़े। फिलहाल सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन और अंडों की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर लगी रोक जारी रहेगी। इस मामले में अंतिम फैसला अब गुजरात हाईकोर्ट की लंबित अपीलों पर सुनवाई के बाद आएगा।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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