SIR पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक:वोटर लिस्ट से नाम हटने पर खत्म नहीं होती नागरिकता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। आयोग का काम केवल मतदाता सूची का नियंत्रण और पर्यवेक्षण करना है। अगर किसी मामले में नागरिकता पर सवाल उठता है तो तय प्रक्रिया के तहत उसे संबंधित मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी।
चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं
पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हट जाने भर से किसी व्यक्ति की नागरिकता अपने आप खत्म नहीं हो जाती। अदालत ने साफ किया कि नागरिकता तय करने की अलग कानूनी प्रक्रिया है और इसे केवल मतदाता सूची से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट की इस टिप्पणी से नागरिकता को लेकर फैल रही कई तरह की आशंकाओं पर भी स्पष्टता आई है।
चुनाव आयोग के अधिकारों की सीमा बताई
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि चुनाव आयोग का संवैधानिक दायरा केवल मतदाता सूची के नियंत्रण, संशोधन और पर्यवेक्षण तक सीमित है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम फैसला करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यदि किसी ट्रिब्यूनल की ओर से कोई मामला सामने आता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल की याचिका पर होगी अगली सुनवाई
SC ने पश्चिम बंगाल से जुड़ी उस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें विधानसभा क्षेत्रवार एसआईआर से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त तय की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और इसे लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी थी चर्चा
हाल ही में झारखंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसमें दावा किया गया था कि एसआईआर फॉर्म भरवाने के नाम पर लोगों से 50 से 100 रुपये तक की कथित उगाही की जा रही है। वीडियो के सामने आने के बाद नागरिकता और एसआईआर को लेकर भ्रम और बढ़ गया था। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर और मतदाता सूची का नागरिकता से सीधा संबंध नहीं है।












