Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Supreme Court:चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मध्यप्रदेश सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मुरैना स्थित राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि सख्ती के बाद खनन माफियाओं ने रास्ते जरूर बदल लिए हैं, लेकिन अवैध गतिविधियां अब भी जारी हैं। कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।
Follow on Google News
चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मध्यप्रदेश सरकार से मांगा जवाब

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अवैध रेत खनन को गंभीर चिंता का विषय बताया। कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार ने बिना नंबर वाले वाहनों से रेत परिवहन की रिपोर्ट देखी है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट सही पाई गई तो इसका मतलब होगा कि सरकार ने कोर्ट को गलत जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट ने ताजा हलफनामा दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन अब भी जारी है। कोर्ट ने माना कि पहले की सख्ती के बाद खनन माफियाओं ने अपने तरीके और रास्ते बदल लिए हैं। इसके बावजूद अवैध खनन पूरी तरह नहीं रुका है। अदालत ने इस मामले को गंभीर पर्यावरणीय और प्रशासनिक चुनौती बताया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

ये भी पढ़ें: बिलासपुर: कार की छत पर लड़की को डांस करना पड़ा महंगा, गाड़ी जब्त; पुलिस ने की कार्रवाई

बिना नंबर वाले वाहनों पर उठे सवाल

अदालत ने मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि बिना नंबर वाले वाहन खुलेआम रेत ढुलाई कर रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने इन रिपोर्टों को देखा है। अदालत ने कहा कि अगर यह जानकारी सही निकली तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। कोर्ट के अनुसार इससे यह संकेत मिलेगा कि सरकार ने पहले दाखिल हलफनामे में सही जानकारी नहीं दी। इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।

घड़ियाल अभयारण्य पर बढ़ रहा खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन से घड़ियाल अभयारण्य जैसे संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। लगातार खनन से प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता प्रभावित हो रही है। अदालत ने बिना पहचान वाले वाहनों की आवाजाही को भी चिंता का विषय बताया। कोर्ट ने संकेत दिए कि निगरानी और रोकथाम के लिए आगे और सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं। वन्यजीव संरक्षण को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है।

ये भी पढ़ें: इंदौर: 30 लाख से ज्यादा लोगों की मुफ्त आंखों की सर्जरी, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुई उपलब्धि

'यदि मीडिया रिपोर्ट सही हैं, तो यह मामला बेहद चौंकाने वाला है।'

मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही है तो मामला चौंकाने वाला है। इससे पहले सरकार ने कोर्ट में कॉम्प्लायंस एफिडेविट दाखिल कर कार्रवाई का ब्यौरा दिया था। इसमें बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और अवैध परिवहन के खिलाफ उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी निगरानी व्यवस्था को शुरुआती स्तर की बता चुका है। अब अदालत ने राज्य सरकार से ताजा हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब मांगा है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

Latest Posts