200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्विस्ट!जैकलीन फर्नांडिस का यू-टर्न, कोर्ट से वापस ली याचिका

25 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला चर्चा में रहा। कोर्ट ने उन्हें अपनी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) वापस लेने की अनुमति दे दी। यह याचिका उन्होंने पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल PMLA कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो अभी इस याचिका को वापस लेकर आगे उचित कानूनी रास्ता अपना सकती हैं। इसके बाद जैकलीन की ओर से वकील ने खुद याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
पूरा मामला क्या है? कैसे शुरू हुई जांच
इस पूरे केस की शुरुआत अगस्त 2021 में हुई थी। एक शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की थी। शिकायत में कहा गया था कि एक बड़े धोखाधड़ी रैकेट के जरिए करीब 200 करोड़ रुपए की ठगी की गई है।
इस रैकेट के मुख्य आरोपी के रूप में सुकेश चंद्रशेखर का नाम सामने आया। आरोप है कि वह जेल में रहते हुए भी एक संगठित सिंडिकेट चला रहा था और खुद को बड़े सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस सिंडिकेट ने हाई-प्रोफाइल लोगों और कारोबारियों को निशाना बनाया और उनसे बड़ी रकम वसूली गई।
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ED की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल
दिल्ली पुलिस की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत केस दर्ज किया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे रैकेट से जो पैसा आया, उसका इस्तेमाल कई तरह से किया गया। इसमें महंगे गिफ्ट, लग्जरी लाइफस्टाइल और सेलिब्रिटीज को दिए गए उपहार शामिल बताए गए हैं। ED के मुताबिक, सुकेश चंद्रशेखर ने इस अवैध कमाई का इस्तेमाल कई नामी हस्तियों को आकर्षित करने और उनसे संपर्क बनाने में किया।
जैकलीन फर्नांडिस पर क्या आरोप?
जांच एजेंसियों का दावा है कि जैकलीन फर्नांडिस को भी इस कथित रैकेट से जुड़े कुछ लाभ मिले थे। ED के अनुसार, उन्हें लगभग 5.71 करोड़ रुपये के गिफ्ट मिले होने की बात सामने आई है। इन गिफ्ट्स में लग्जरी ब्रांड के बैग, महंगे ज्वेलरी सेट, डिजाइनर घड़ियां, परिवार के लिए गाड़ियां, विदेशी ट्रांसफर से जुड़ी सुविधाएं और अन्य हाई-वैल्यू आइटम्स को शामिल बताया गया है। हालांकि, जैकलीन की ओर से लगातार यह कहा गया है कि उन्हें इस पैसे के अपराध से जुड़े होने की जानकारी नहीं थी।
हाई कोर्ट का पहले का फैसला
3 जुलाई 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था। जैकलीन की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें ECIR (Enforcement Case Information Report) और ED की शिकायत को रद्द करने की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट ने कहा था कि यह तय करना कि आरोपी को अपराध की जानकारी थी या नहीं और उनका इरादा क्या था। ये सभी सवाल ट्रायल के दौरान ही तय किए जा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्ज तय करने की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इस स्तर पर केस को खत्म नहीं किया जा सकता।
30 मई 2026: चार्ज फ्रेमिंग का आदेश
इसके बाद 30 मई 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल PMLA अदालत ने बड़ा कदम उठाया। अदालत ने आदेश दिया कि इस मामले में सभी प्रमुख आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जाएंगे। चार्ज तय होने का मतलब यह है कि अदालत अब मानती है कि केस ट्रायल के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में गवाहों की सुनवाई, सबूतों की जांच और क्रॉस एग्जामिनेशन होगा।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद मामला अब निचली अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। इसका मतलब है ट्रायल की सुनवाई जारी रहेगी, ED अपने सबूत पेश करेंगे और बचाव पक्ष अपनी दलीलें रखेगा। यह केस अभी पूरी तरह शुरुआती ट्रायल चरण में है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।











