देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के लिए 1 साल से नहीं मिला स्टाफ

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट: एमपी-यूपी से मांगे 100 से ज्यादा इंजीनियर
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देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के लिए 1 साल से नहीं मिला स्टाफ

अशोक गौतम-भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी और देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा के काम के लिए कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों की उदासीनता से परियोजना को संचालित करने वाले प्राधिकरण (केबीएलपीए) का काम धीमी गति से चल रहा है। प्राधिकरण एक साल पहले से दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग से करीब 200 तकनीकी स्टाफ सहित अन्य कर्मचारियों की डिमांड कर रहा है, लेकिन अभी तक स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया है।

25 दिसंबर को परियोजना की नींव रखने के बाद नागार्जुन कंपनी ने पन्ना में दोधन डैम का काम शुरू कर दिया है। बांध तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए छतरपुर और उत्तर प्रदेश के बांध की तरफ से पक्की रोड बन रही है। इसके साथ ही परियोजना के लिए कार्यालय भी बन रहे हैं। इन कामों की मॉनीटरिंग के लिए अधिकारी- कर्मचारियों की डिमांड की जा रही है।

ये आ रही समस्या : अधिकारियों की मानें तो मध्यप्रदेश में लंबे समय से पदोन्नति नहीं हो पाई है। इसके चलते एई के पद पर पदस्थ इंजीनियरों को एसई का चार्ज दिया गया है। प्राधिकरण ने इंजीनियर तो मांगे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है, कौन से पद पर लेंगे और क्या वेतनमान रहेगा।

परियोजना के बारे में : केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई और 2.13 किलोमीटर लंबाई वाला बांध बनाया जाएगा। इसके साथ ही दो टनल का निर्माण कर बांध में 2,853 मिलियन घन मीटर पानी को स्टोर किया जाएगा।

ऑफिस में स्पेस की समस्या भी

प्राधिकरण ने जल संसाधन विभाग से यहां ऑफिस स्पेस मांगा था, लेकिन जितना स्पेस मिलना चाहिए उतना अभी तक नहीं मिल पाया है। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों को बैठने और काम करने में दिक्कत हो रही है। अब परियोजना का काम शुरू हो गया है, कर्मचारियों की भर्ती भी शुरू हो गई है। इससे कर्मचारियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ेगी, इससे अब और ज्यादा जगह की समस्या हो रही है।

कर्मचारियों से मांगी है सहमति

केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण के लिए इंजीनियर और कर्मचारियों को देने का प्रस्ताव आया था। यह प्रस्ताव शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है। वहीं जिन इंजीनियरों और कर्मचारियों को भेजने का प्रस्ताव है, उनसे भी सहमति मांगी गई है। -अखिलेश कुमार सचान, ईएनसी (एचओडी) जल संसाधन विभाग,यूपी

1 साल से कर रहे डिमांड

उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग से इंजीनियरों और कर्मचारियों से एक साल पहले डिमांड की गई है, अभी तक स्टाफ नहीं उपलब्ध कराया गया है। स्टाफ नहीं मिलने से परियोजना की डीपीआर, निरीक्षण, मॉनीटरिंग सहित कार्यों में विलंब होता है। -प्रशस्त कुमार दीक्षित, सीईओ, केबीएलपीए

जल्द उपलब्ध कराएंगे इंजीनियर

प्राधिकरण ने इंजीनियर और कर्मचारियों की डिमांड की है, जल्द उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। उनसे कुछ जानकारी मांगी गई है, जवाब जैसे ही आएगा, उसी के अनुसार कर्मचारी अधिकारी उपलब्ध कराए जाएंगे। -विनोद देवड़ा, ईएनसी, जल संसाधन विभाग मप्र

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