इंदौर:भीषण गर्मी में ट्रैफिक जवानों के सारथी बने युवा, रोज पानी और छाछ से दे रहे राहत

इंदौर में भीषण गर्मी के बीच जहां आम लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं वहीं ट्रैफिक जवान चिलचिलाती धूप में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। ऐसे में शहर के कुछ युवाओं ने आगे आकर इन जवानों के लिए राहत का काम शुरू किया है।
भीषण गर्मी में ट्रैफिक जवानों के सारथी बने युवा, रोज पानी और छाछ से दे रहे राहत

ललित मोरवाल ,इंदौर। शहर में भीषण गर्मी के बीच जहां आम लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं वहीं ट्रैफिक जवान चिलचिलाती धूप में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। ऐसे में शहर के कुछ युवाओं ने आगे आकर इन जवानों के लिए राहत का काम शुरू किया है। प्रहरी संस्था के माध्यम से 100 से अधिक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स ट्रैफिक जवानों के लिए पानी और छाछ जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल गर्मी में ड्यूटी कर रहे जवानों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।

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2022 से शुरू हुई पहल, अब बन चुकी है मिशन

इस अभियान की शुरुआत साल 2022 में एक छोटे से अनुभव से हुई। संस्था के संस्थापक मनीष सेंगर ने बताया कि एक दिन ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े जवान को लंबे समय तक बिना पानी के ड्यूटी करते देखा। उसी समय यह महसूस हुआ कि इन जवानों की मदद के लिए कुछ किया जाना चाहिए। तभी से यह पहल शुरू हुई जो अब नियमित अभियान का रूप ले चुकी है।

रोज 30-50 बोतलें पहुंचा रहे जवानों तक

इंदौर, देवास और उज्जैन में सक्रिय यह टीम रोजाना 30 से 50 पानी की बोतलें ट्रैफिक जवानों तक पहुंचाती है।इस टीम में बैंकिंग, फाइनेंस और आईटी सेक्टर से जुड़े युवा शामिल हैं जिनमें 20 से अधिक महिलाएं भी हैं। खास बात यह है कि ये सभी लोग बिना किसी बाहरी मदद के अपनी जेब से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये खर्च करते हैं।

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पानी के साथ मेडिकल कैंप और खुशियां भी

यह पहल सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। टीम समय-समय पर ट्रैफिक जवानों के लिए मेडिकल कैंप भी आयोजित करती है। साथ ही उनके जन्मदिन मनाकर उनके तनावपूर्ण जीवन में कुछ खुशी के पल जोड़ने की कोशिश भी की जाती है।

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छाछ से भी मिल रही ठंडक

इसी कड़ी में इंदौर के व्यवसायी विवेक खंडेलवाल भी जवानों की मदद में जुटे हैं। वे हर दूसरे दिन करीब 70 लीटर छाछ लेकर अलग-अलग चौराहों पर तैनात जवानों को पिलाते हैं। पिछले साल उन्होंने जलजीरा वितरण किया था और इस बार छाछ के जरिए गर्मी में राहत दे रहे हैं।

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जवानों ने कहा- प्यास ही नहीं दिल भी ठंडा होता है

ट्रैफिक सूबेदार काजिम रिजवी का कहना है कि यह पहल सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है बल्कि इससे जवानों को मानसिक सुकून भी मिलता है। जवानों के मुताबिक जब कोई उन्हें नाम लेकर सम्मान के साथ पानी पिलाता है तो इससे उनका मनोबल भी बढ़ता है और ड्यूटी करने की ऊर्जा भी मिलती है।

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मानवता की मिसाल बनी पहल

भीषण गर्मी में यह पहल शहर के लिए एक मिसाल बन गई है। जहां एक ओर लोग गर्मी से बचने के उपाय ढूंढ रहे हैं वहीं ये युवा दूसरों के लिए राहत का कारण बन रहे हैं। यह अभियान दिखाता है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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