'सफेद चादर का कफन लेकर आई BJP...'सोनम वागंचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर डिंपल यादव ने सरकार को घेरा, बोलीं- यह तानाशाही है

मैनपुरी। दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ कदम बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाना देश की आत्मा को दबाने जैसा है। इस बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
डिंपल यादव का सरकार पर हमला
मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दो पोस्ट करते हुए इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं। यह तानाशाही है।
कुछ ही देर बाद उन्होंने एक और पोस्ट में कहा कि, बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।
वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंची थीं डिंपल
यह पहली बार नहीं है जब डिंपल यादव ने सोनम वांगचुक का समर्थन किया हो। 16 जुलाई को वह समाजवादी पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ जंतर-मंतर पहुंची थीं। उन्होंने वांगचुक से मुलाकात की थी और आंदोलन के समर्थन में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे भी लगे थे। अब अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उन्होंने फिर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली पुलिस ने क्यों कराया अस्पताल में भर्ती?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर की गई। पुलिस ने बताया कि लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार कमजोर हो रही थी, इसलिए उन्हें जरूरी चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक था। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से धरना स्थल खाली करने की भी अपील की गई।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए जबरन ले जाने के आरोप
दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी डॉक्टरों के भेष में धरना स्थल पहुंचे और सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले गए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस तरह के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और कहा है कि पूरी कार्रवाई कानून और अदालत के आदेशों के अनुरूप की गई।
सचिन पायलट बोले- सरकार को संवाद करना चाहिए था
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो आंदोलनकारियों से संवाद किया और न ही उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया। पायलट के मुताबिक, यदि सरकार बातचीत का रास्ता अपनाती तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही से बचने के लिए वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।
मनीष सिसोदिया ने भी साधा निशाना
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर आवाज उठाने वालों को इस तरह हटाया जाएगा तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही संदेश नहीं है। उन्होंने सरकार पर आंदोलन की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
CJP ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि, पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं अनशन पर बैठेंगे और आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने से आंदोलन खत्म नहीं होगा।
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, लंबे समय तक भूख हड़ताल और डिहाइड्रेशन के कारण सोनम वांगचुक काफी कमजोर हो गए हैं। हालांकि फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई गई है। अस्पताल ने कहा है कि उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत सामान्य हैं, लेकिन उन्हें लगातार डॉक्टरों की निगरानी और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है।
पत्नी ने इलाज को लेकर रखी शर्त
अस्पताल में मौजूद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा है कि परिवार, उनके निजी डॉक्टरों और उनकी सहमति के बिना वांगचुक को न तो मुंह से कोई दवा दी जाए और न ही ड्रिप या किसी अन्य माध्यम से इलाज शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि उपचार से जुड़ा हर फैसला परिवार और इलाज कर रहे डॉक्टरों की सहमति से ही होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे थे। 21 दिनों के दौरान उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम तक घट गया और स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।











