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महाकाल की शरण में पहुंचीं सोनल चौहान:भस्म आरती में हुईं शामिल, नंदी के कान में कही मनोकामना और लिया बाबा का आशीर्वाद

रात 2 बजे महाकाल मंदिर पहुंचीं सोनल चौहान ने ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती में हुईं शामिल, नंदी जी की पूजा कर कान में कही अपनी मनोकामना, पूरे श्रद्धा भाव से जल अर्पित कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया, मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
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भस्म आरती में हुईं शामिल, नंदी के कान में कही मनोकामना और लिया बाबा का आशीर्वाद
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर एक ऐसा आस्था केंद्र है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आम लोगों के साथ साथ देश विदेश की कई हस्तियां भी यहां आकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इसी कड़ी में इस बार बॉलीवुड और तेलुगु फिल्मों की चर्चित अभिनेत्री सोनल चौहान भी बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचीं, जहां उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद लिया।

    रात 2 बजे मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री

    सोनल चौहान का यह दौरा अचानक नहीं बल्कि पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया था। वह देर रात करीब 2 बजे महाकाल मंदिर पहुंचीं। आम भक्तों की तरह उन्होंने भी मंदिर परिसर में प्रवेश किया और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का इंतजार किया। करीब दो घंटे तक उन्होंने वहीं बैठकर ध्यान और भक्ति में समय बिताया, सुबह करीब 4 बजे जब महाकाल का जागरण हुआ और आरती की तैयारियां शुरू हुईं, तब मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह भक्ति में डूब चुका था। सोनल भी उसी माहौल में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल रहीं।

    भस्म आरती में दिखी गहरी आस्था

    भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे खास और प्राचीन परंपराओं में से एक है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें भस्म अर्पित की जाती है। सोनल चौहान ने भी इस आरती में भाग लिया और पूरे समय भगवान का जाप करती नजर आईं। उनके चेहरे पर एक अलग ही शांति और भक्ति का भाव दिखाई दे रहा था।

    नंदी जी के कान में कही अपनी इच्छा

    महाकाल मंदिर में एक खास परंपरा है, जिसमें भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि नंदी जी भगवान शिव तक भक्तों की बात पहुंचाते हैं। सोनल चौहान ने भी इस परंपरा का पालन किया। उन्होंने नंदी जी की विधिवत पूजा की और उनके कान में अपनी मनोकामना कही। यह पल वहां मौजूद लोगों के लिए भी खास बन गया, क्योंकि उन्होंने एक मशहूर अभिनेत्री को पूरी श्रद्धा के साथ इस परंपरा को निभाते हुए देखा।

    जल अर्पित कर लिया आशीर्वाद

    भस्म आरती के बाद सोनल चौहान ने भगवान महाकाल के दर्शन किए और मंदिर की देहरी से जल अर्पित किया। उन्होंने भगवान से आशीर्वाद लिया और कुछ समय तक मंदिर परिसर में ही रहीं। उनकी इस यात्रा के दौरान मंदिर समिति की ओर से उनका सम्मान भी किया गया। यह सम्मान उनकी आस्था और मंदिर के प्रति श्रद्धा को देखते हुए दिया गया।

    महाकाल की नगरी में गूंजे जयकारा

    जिस समय भस्म आरती हो रही थी, उस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। वातावरण में भक्ति, ऊर्जा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोनल चौहान भी इस माहौल में पूरी तरह खोई नजर आईं। वह लगातार भगवान का नाम जपती रहीं और आरती के हर पल को ध्यानपूर्वक देखती रहीं।

    आस्था और प्रसिद्धि का संगम

    महाकाल मंदिर में अक्सर देखा जाता है कि बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी यहां आम भक्तों की तरह ही दर्शन करते हैं। सोनल चौहान का यह दौरा भी उसी का एक उदाहरण रहा। उन्होंने किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लिया, बल्कि आम श्रद्धालुओं की तरह ही मंदिर में समय बिताया। यह बात लोगों को काफी पसंद आई और सोशल मीडिया पर भी उनकी सादगी और भक्ति की चर्चा होने लगी।

    फिल्मों से लेकर आस्था तक का सफर

    अगर सोनल चौहान के करियर की बात करें, तो उन्होंने हिंदी और तेलुगु दोनों फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत हिंदी फिल्म जन्नत से की थी, जिसमें उनके किरदार को काफी सराहा गया। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य फिल्मों में भी काम किया है, जिनमें एक्शन और ड्रामा दोनों तरह की फिल्में शामिल हैं। तेलुगु सिनेमा में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। साल 2005 में उन्होंने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और उसी साल मिस वर्ल्ड टूरिज्म का खिताब भी अपने नाम किया। यह उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि रही।

    उज्जैन का धार्मिक महत्व

    उज्जैन को भारत की धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित महाकाल मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका विशेष महत्व है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन भस्म आरती के समय का महत्व सबसे ज्यादा होता है। यहां होने वाली हर आरती और पूजा का अपना अलग महत्व है, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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