सोहागपुर-सेहरा के जंगल में विद्यार्थियों ने जाना वन्यजीव संरक्षण का महत्व, प्राकृतिक सौंदर्य से हुए रूबरू
सोहागपुर। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर विवेकानंद एकेडमी के 60 छात्र-छात्राओं ने सेहरा के जंगल का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वन्यजीवों, वनस्पतियों और जंगल के प्राकृतिक परिवेश को करीब से समझा तथा वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। विद्यार्थियों ने जंगल भ्रमण के साथ सहभोज का भी आनंद लिया।
वन अधिकारियों ने बाघ, बायसन और भालू की दी जानकारी
भ्रमण के दौरान वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी शिव प्रसाद मिथानी एवं रेंज ऑफिसर बिलास डोंगरे ने विद्यार्थियों को बाघ, बायसन, भालू सहित विभिन्न वन्यजीवों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने जंगल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों एवं वनस्पतियों की उपयोगिता तथा वन्यजीव संरक्षण के महत्व से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
नदी किनारे सुरक्षित भ्रमण, विद्यार्थियों ने पूछे सवाल
वन विभाग के कर्मचारियों मुकेश बरकरे, नरेंद्र परते, दुष्यंत मीना, दीपक राजपूत एवं रमाकांत श्रोती ने विद्यार्थियों को जंगल एवं नदी किनारे सुरक्षित रूप से भ्रमण कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रकृति को करीब से देखा और वन्यजीवों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

मढ़ई के प्राकृतिक सौंदर्य ने किया आकर्षित
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को मढ़ई के इस पार स्थित बफर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी करीब से देखने का अवसर मिला। क्षेत्र में अनेक नयनाभिराम और दर्शनीय स्थल हैं, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य से लोगों को आकर्षित करते हैं। सेहरा के आगे स्थित जमानी देव भी ऐसा ही रमणीक स्थल है। देनवा नदी के किनारे यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखने को मिलता है। जंगल की हरियाली, देनवा नदी और प्राकृतिक वातावरण ने विद्यार्थियों को खासा आकर्षित किया।
पट्टन क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं
क्षेत्र में स्थित चित्तौड़ी पट्टन भी अपने पुरातात्विक महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां मौजूद प्राचीन शैलचित्र एवं अन्य अवशेष क्षेत्र के पुरातात्विक इतिहास को उजागर करते हैं। हालांकि विस्थापन के बाद पट्टन क्षेत्र वर्तमान में प्रतिबंधित हो गया है, जिसके कारण आम पर्यटकों की पहुंच यहां नहीं है। जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में नियमानुसार पर्यटन की संभावनाओं को और विकसित किया जाए और पर्यटकों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित हो सके, तो पट्टन सहित सेहरा और जमानी देव क्षेत्र और अधिक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं। हालांकि इन क्षेत्रों को वर्तमान हालात में पहुंचाने का श्रेय भी एक कलमकार को ही जाता है, अन्यथा यह इलाका आज भी अबूझा ही रहता। मढ़ई सहित बिनेका ढाबा, कुकरा, पट्टन आदि निरंतर लेखन की ही उपज हैं।





















