फोकस, मेमोरी और इमोशन…सब पर असर डाल रहा सिगरेट और गांजा! नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

हेल्थ डेस्क। आज की युवा पीढ़ी खासतौर पर Gen-Z और Millennials के बीच सिगरेट और गांजा (वीड) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पार्टी, स्ट्रेस या कूल दिखने के लिए शुरू हुई ये आदत अब एक ऐसे ट्रेंड में बदल चुकी है, जिसे समाज में धीरे-धीरे सामान्य माना जाने लगा है। लेकिन हाल ही में आई एक बड़ी रिसर्च ने इस ट्रेंड के पीछे छिपे खतरनाक सच को उजागर कर दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये सिर्फ एक नशा नहीं, बल्कि दिमाग को अंदर से कमजोर करने वाली प्रोसेस है जो समय के साथ आपके ब्रेन को सिकोड़ भी सकती है।
दुनिया भर में बढ़ता चलन
गांजा और तंबाकू का उपयोग अब सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या बन चुका है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में करीब 23 करोड़ लोग गांजा का सेवन कर रहे थे। यह संख्या कुल वैश्विक आबादी का लगभग 4.4% है।
वहीं तंबाकू का इस्तेमाल और भी ज्यादा व्यापक है, करीब 30% आबादी इसका सेवन करती है। हर साल तंबाकू के कारण लगभग 80 लाख मौतें होती हैं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि, यह सिर्फ व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
72 हजार लोगों पर गहराई से स्टडी
इस नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में हुई करीब 100 अलग-अलग रिसर्च का विश्लेषण किया। इसमें 72,000 से ज्यादा लोगों के डेटा को शामिल किया गया।
रिसर्च में तीन प्रमुख तरीके अपनाए गए-
- Cross-sectional studies
- Longitudinal studies
- Mendelian Randomization (MR)
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि कुछ डेटा असंतुलित था जैसे गांजा पर पुरुषों के सैंपल ज्यादा थे, जबकि तंबाकू में महिलाओं के। फिर भी, उपलब्ध डेटा से जो निष्कर्ष सामने आए, वो चौंकाने वाले हैं।
यह भी पढ़ें: कुंवारों या शादीशुदा, किन लोगों में ज्यादा है कैंसर का खतरा, जानें रिसर्च में क्या आया ?
दिमाग पर असर- अंदर ही अंदर हो रहा नुकसान
1. भावनाएं और डर- एमिग्डाला पर असर
गांजा का सेवन करने वाले कुछ लोगों में दिमाग का एक हिस्सा ‘एमिग्डाला’ छोटा पाया गया। यह हिस्सा डर, चिंता और भावनाओं को नियंत्रित करता है। इसके प्रभावित होने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। तनाव और चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, यह असर हर उम्र में एक जैसा नहीं देखा गया, लेकिन संकेत गंभीर हैं।
2. याददाश्त पर हमला- हिप्पोकैम्पस सिकुड़ने का खतरा
तंबाकू के अधिक सेवन से दिमाग का हिप्पोकैम्पस प्रभावित होता है। यह हिस्सा याददाश्त और सीखने से जुड़ा होता है। इसके सिकुड़ने से चीजें याद रखने में दिक्कत होती है। नई जानकारी को समझना और सीखना मुश्किल हो सकता है। रिसर्च में पाया गया कि, यह असर तंबाकू यूजर्स में ज्यादा स्पष्ट था।
3. शरीर के संकेत बिगड़ना- इंसुला पर असर
दिमाग का इंसुला हिस्सा शरीर के अंदरूनी संकेतों को समझता है- जैसे भूख, प्यास या दर्द। तंबाकू के सेवन से यह हिस्सा प्रभावित हो सकता है। शरीर के संकेत सही तरीके से महसूस नहीं होते। चिड़चिड़ापन और असंतुलन बढ़ सकता है।
4. सोचने-समझने की ताकत- ग्रे मैटर में कमी
तंबाकू का असर पूरे दिमाग के ग्रे मैटर पर भी देखा गया। ग्रे मैटर हमारी सोचने और निर्णय लेने की क्षमता का आधार है। इसके कम होने से फोकस कमजोर होता है। मानसिक थकान और सुस्ती बढ़ती है। यही वजह है कि, लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में मानसिक प्रदर्शन (Mental Performance) कम हो सकता है।

जितनी ज्यादा सिगरेट, उतना ज्यादा खतरा
स्टडी में एक बात बिल्कुल साफ सामने आई कि जितनी ज्यादा मात्रा में और जितने लंबे समय तक सिगरेट का सेवन किया जाता है, नुकसान उतना ही बढ़ता जाता है। जिन लोगों ने ज्यादा सिगरेट पी, उनमें दिमाग के सिकुड़ने का खतरा अधिक पाया गया और जो लंबे समय से इसका सेवन कर रहे थे, उनमें यह असर और भी गहरा दिखा। खासतौर पर दिमाग का वह हिस्सा जो याददाश्त से जुड़ा होता है, सबसे पहले प्रभावित होता है। जिससे चीजें याद रखने और सीखने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है।
धुआं कैसे पहुंचाता है दिमाग तक जहर?
जब सिगरेट या गांजा जलता है, तो इस प्रक्रिया को कंबशन (Combustion) कहा जाता है, जिसमें कई हानिकारक तत्व निकलते हैं। इस दौरान Reactive Oxygen Species जैसे खतरनाक केमिकल्स बनते हैं, जो दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं और सूजन (Inflammation) को बढ़ाते हैं। इसका सीधा असर दिमाग की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स पर पड़ता है, जो धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं और समय के साथ नष्ट भी हो सकते हैं।
गांजा vs तंबाकू: किसका असर ज्यादा?
रिसर्च के अनुसार, तंबाकू का असर दिमाग पर ज्यादा स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से मजबूत पाया गया है, जबकि गांजा के प्रभाव के कुछ संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इस पर अभी और गहराई से अध्ययन की जरूरत है। वहीं दोनों को एक साथ लेने के प्रभाव पर फिलहाल पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू और गांजा का कॉम्बिनेशन दिमाग के लिए और भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है।
क्या कभी-कभार पीने वाले सुरक्षित हैं?
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या कभी-कभार सेवन करना सुरक्षित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत कोई बड़ा असर दिखाई नहीं देता, लेकिन दिमाग में होने वाले बदलाव धीरे-धीरे होते हैं। कई बार यह नुकसान सालों बाद सामने आता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। यानी सिर्फ कभी-कभी की आदत भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।

गरीब वर्ग पर ज्यादा असर क्यों?
तंबाकू के इस्तेमाल का एक सामाजिक पहलू भी सामने आया है, जिसमें देखा गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में इसका उपयोग ज्यादा होता है। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर ज्यादा असर पड़ता है, बल्कि इलाज का खर्च भी बढ़ता है और सामाजिक समस्याएं भी गहराती हैं। इस तरह यह मुद्दा सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन जाता है।
चेतावनी जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
इस स्टडी के निष्कर्ष बताते हैं कि, सिगरेट और गांजा का सेवन दिमाग के साइज को प्रभावित कर सकता है। खासकर तंबाकू का असर ज्यादा स्पष्ट और खतरनाक पाया गया है। इससे दिमाग के वे हिस्से ज्यादा प्रभावित होते हैं, जो याददाश्त और भावनाओं से जुड़े होते हैं। अगर लंबे समय तक इनका सेवन किया जाए, तो यह असर स्थायी भी हो सकता है, जो व्यक्ति की मानसिक क्षमता पर गहरा प्रभाव डालता है।
‘छोटी आदत’ से ‘बड़े नुकसान’ तक का सफर
आज के समय में सिगरेट और गांजा को एक लाइफस्टाइल का हिस्सा मान लिया गया है। लेकिन यह रिसर्च बताती है कि यह नॉर्मल नहीं, बल्कि एक खतरनाक ट्रेंड है। जो आदत आज आपको रिलैक्स महसूस कराती है, वही धीरे-धीरे आपके दिमाग की क्षमता को कम कर सकती है। यह सिर्फ आपकी हेल्थ नहीं, बल्कि आपकी सोच, निर्णय और भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।











