दहेज के लिए पत्नी को दिया तीन तलाक, पति की याचिका खारिज; हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार

जबलपुर। अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों का परीक्षण सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में ही होगा। हाईकोर्ट पुनरीक्षण याचिका के आधार पर सबूतों का परीक्षण नहीं कर सकता।
नासिक में रहने वाले पति ने दायर की थी याचिका
हाईकोर्ट में यह याचिका महाराष्ट्र के नासिक में रहने वाले सुफीयान खान और अन्य की ओर से दायर की गई थी। उसका निकाह 29 जुलाई 2021 को भोपाल में मुस्लिम रीति-रिवाजों के साथ नियाज से हुआ था और निकाह के बाद हुए विवाद के आधार पर पत्नी ने याचिकाकर्ता और उसके परिजनों के खिलाफ भोपाल पुलिस को शिकायत दी थी।
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2023 में महिला थाने में दर्ज हुई एफआईआर
महिला थाने में वर्ष 2023 में पति सूफीयान और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-A, 377, 354, 506 सहपठित धारा 34, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। इसी एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
रहने की जगह को लेकर विवाद का दिया हवाला
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वैवाहिक विवाद का मुख्य कारण रहने की जगह को लेकर मतभेद था। पत्नी अपने मायके भोपाल में रहना चाहती थी, जबकि पति अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए उनके साथ रहना चाहता था।
आरोपों को बताया झूठा और मनगढ़ंत
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि दहेज की मांग, उत्पीड़न और ट्रिपल तलाक के आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला और पत्नी की ओर से अधिवक्ता नईम खान ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
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हाईकोर्ट ने सबूतों के परीक्षण से किया इनकार
सुनवाई के बाद जस्टिस हिमान्शु जोशी की सिंगल बेंच ने एफआईआर में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों का परीक्षण सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में ही होगा और हाईकोर्ट पुनरीक्षण याचिका के आधार पर सबूतों का परीक्षण नहीं कर सकता।




















