कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले...बेमौसम बारिश से 2.49 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों को नुकसान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अब तक 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें सबसे अधिक गेहूं की खेती प्रभावित हुई है।
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बेमौसम बारिश से 2.49 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों को नुकसान
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में 'उन्नत कृषि मेला' शुरू होने से पहले यहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि असामान्य मौसम और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तीन विभागों की ओर से सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से भी तुरंत नुकसान का आकलन करने को कहा गया है। चौहान ने कहा कि आठ अप्रैल तक हुए नुकसान में गेहूं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है और इसके बाद आम और लीची जैसी बागवानी फसलें प्रभावित हुई हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अब तक 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है।उन्होंने आश्वासन दिया, 'मोदी सरकार इस संकट में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।'

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    प्रभावित राज्यों में समीक्षा के निर्देश 

    केंद्रीय कृषि मंत्री ने पांच अप्रैल को अधिकारियों को प्रभावित राज्यों में नुकसान की समीक्षा करने और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया था। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के कृषि मंत्रियों से भी परामर्श किया है। इससे पहले भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आगाह किया था कि सात अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा।

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    कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान

    उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश के अलावा गरज के साथ छींटे पड़ने और ओलावृष्टि के आसार हैं। आईएमडी के मुताबिक मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, तेलंगाना, जम्मू और कश्मीर, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम-मेघालय में आंधी-तूफान के साथ मध्य, उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि हुई। आईएमडी ने जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर प्रदेश, बांग्लादेश, असम और ओडिशा में चक्रवाती परिसंचरण और संबंधित ट्रफ के कारण 9-15 अप्रैल तक और अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है।

    खरीफ से पहले खाद आपूर्ति पर जोर 

    जून से खरीफ की बुवाई के लिए किसानों की तैयारी के बीच चौहान ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया के तनाव से वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा, खरीफ 2026 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी बढ़ाकर 41,534 करोड़ रुपए कर दी गई है। आयात स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा, सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे।

    एग्रीस्टैक से कालाबजारी पर रोक की पहल 

    चौहान ने कहा कि औद्योगिक उपयोग के मद्देनजर उर्वरकों की कालाबजारी रोकने के लिए हरियाणा और मध्यप्रदेश में 'एग्रीस्टैक' नाम की एक पायलट परियोजना क्रियान्वित की जा रही है, जिसके तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है। इससे खाद, बीज और सरकारी सब्सिडी सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। चौहान ने इस अवसर पर कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत के हर नागरिक तक पोषणयुक्त आहार पहुंचाना और खेती पर निर्भर 46 प्रतिशत आबादी की आय लगातार बढ़ाना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

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    दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता पर फोकस 

    उन्होंने कहा कि इसी दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने के लिए रायसेन में राष्ट्रीय स्तर के 'उन्नत कृषि महोत्सव' आयोजित किया जा रहा है। चौहान ने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि अनाज के साथ फल, सब्जियां, दूध, श्री अन्न और दालों की पर्याप्त उपलब्धता कराकर पोषण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार एक साथ उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियों के विस्तार पर काम कर रही है। चौहान ने कहा कि गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आज भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का जोर दलहन–तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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