नई दिल्ली। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार हर वर्ष 22 प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का लाभ सुनिश्चित करना है। इसके लिए उर्वरकों पर सब्सिडी जारी रखी जा रही है और बीजों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल के प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने साफ किया कि MSP का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है। इस प्रक्रिया में उत्पादन लागत, फसलों की मांग और आपूर्ति की स्थिति, घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमतें तथा अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखा जाता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। MSP नीति के साथ-साथ इनपुट लागत कम करने और जरूरी संसाधन सुलभ कराने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। यदि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक दाम मिलता है, तो वे खुले बाजार में अपनी फसल बेच सकते हैं। MSP को किसानों के लिए एक सुरक्षा जाल के तौर पर देखा जाता है, न कि बिक्री पर बाध्यता के रूप में।
सरकारी व्यवस्था के तहत धान और गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के माध्यम से MSP पर की जाती है। वहीं दालों, तिलहन और कोप्रा की खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत होती है। कपास और जूट की खरीद क्रमशः कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जरिए की जाती है।
सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य की गारंटी देना है, साथ ही बाजार में बेहतर दाम मिलने पर उन्हें विकल्प की आज़ादी भी देना है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलती है।