मॉस्को। रूस ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मुताबिक, अमेरिका वैश्विक स्तर पर अपना आर्थिक दबदबा बनाए रखने के लिए दबाव की राजनीति अपना रहा है। लावरोव ने कहा कि अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और सीधे तौर पर रोक लगाने जैसे कदमों के जरिए देशों पर दबाव डाल रहा है, ताकि वे रूस से ऊर्जा और अन्य संसाधनों की खरीद न करें। उनका आरोप है कि यह नीति मुक्त व्यापार और संप्रभु देशों के स्वतंत्र फैसलों के खिलाफ है।
रूस का कहना है कि इस तरह के दबाव से न सिर्फ वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है, बल्कि विकासशील देशों के हितों को भी नुकसान पहुंच रहा है। मॉस्को के अनुसार, देश अपनी जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर व्यापारिक फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं और बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक टीवी इंटरव्यू में अमेरिका पर और कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जैसे बड़े रणनीतिक साझेदारों के साथ रूस के व्यापारिक और सैन्य संबंधों को नियंत्रित करना चाहता है। लावरोव के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद विरोधियों को दबाने की यह नीति अब खुलकर सामने आ गई है।
लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश अपनी पुरानी दबदबे वाली स्थिति छोड़ने को तैयार नहीं हैं और वैश्विक व्यवस्था में बराबरी के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने के बजाय दबाव और गलत तरीकों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका निष्पक्ष मुकाबले की जगह प्रतिबंध, टैरिफ और राजनीतिक दबाव जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है। रूस का कहना है कि यह रवैया अंतरराष्ट्रीय नियमों और स्वतंत्र देशों के संप्रभु अधिकारों के खिलाफ है। लावरोव के अनुसार, वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में संतुलन तभी संभव है, जब सभी देशों को बिना बाहरी दबाव के अपने फैसले लेने का स्वतंत्र आजादी मिले।
भारत की BRICS अध्यक्षता को लेकर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पॉजिटिव रिसपॉन्स दिया है। उन्होंने कहा कि भारत जिन मुद्दों को BRICS मंच पर आगे बढ़ा रहा है, वे पूरी तरह से आज की वैश्विक जरूरतों से जुड़े हुए हैं। लावरोव के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय मौजूदा दौर में बेहद अहम हैं।
लावरोव ने बताया कि भारत फरवरी महीने में AI पर एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें रूस भी भाग लेगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर वैश्विक नियमों की जरूरत है, लेकिन ये नियम ऐसे होने चाहिए, जो सभी देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान करें।
रूस का मानना है कि AI के क्षेत्र में किसी एक देश का वर्चस्व नहीं होना चाहिए और न ही तकनीक का इस्तेमाल दूसरों पर दबाव बनाने के लिए किया जाना चाहिए।