भोपाल। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना से अनुप्राणित खजुराहो, जो अपने अद्वितीय पाषाण मंदिरों और यूनेस्को की विश्व धरोहर पहचान के लिए विश्वविख्यात है। इसके साथ ही खजुराहो की पहचान यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले खजुराहो नृत्य समारोह से भी रही है। यह प्राचीन नगर एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की साधना, सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का साक्षी बनने जा रहा है। बसंत ऋतु के आगमन के साथ जब मंदिर प्रांगण में तबले की थाप पर घुंघरुओं की झंकार गूँजती है, तब खजुराहो नृत्य समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत उत्सव बन जाता है।
होटल पलाश में आयोजित की गई प्रेसवार्ता में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन–छतरपुर के सहयोग से 52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह 20 से 26 फरवरी, 2026 तक कंदरिया महादेव एवं जगदंबा मंदिर परिसर, खजुराहो में आयोजित किया जाएगा।
संचालक, संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर सुदृढ़ हो रही है। मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार इस वर्ष खजुराहो नृत्य समारोह को शास्त्रीय नृत्य की प्रेरणा और आधार ‘नटराज’ की थीम पर केंद्रित किया गया है। यह थीम भारतीय दर्शन, सृजन और लयबद्ध जीवन दृष्टि का प्रतीक है, जो समारोह को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान करती है।
उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि मंदिरों के मध्य निर्मित भव्य मंच पर कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कथकली, मणिपुरी एवं छाऊ जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियाँ होंगी। इस वर्ष भी पद्म पुरस्कार प्राप्त, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित तथा राष्ट्रीय–राज्य स्तरीय अलंकरणों से विभूषित कलाकारों के साथ उदीयमान प्रतिभाओं को समान मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे नृत्य की गुरु–शिष्य परम्परा और निरंतरता सुदृढ़ हो सके।
खजुराहो नृत्य समारोह में प्रथम बार सांस्कृतिक रैली का आयोजन भी किया जा रहा है। यह नवाचार भारतीय संस्कृति एवं परम्परा के गौरव एवं सौंदर्य को प्रस्तुत करने का प्रयास है। इस रैली में विभिन्न विधाओं एवं परंपराओं के नृत्य कलाकार खजुराहो के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। इसका प्रारम्भ समारोह के शुभारंभ अवसर पर 20 फरवरी, 2026 से होगा।
52वें खजुराहो नृत्य समारोह की केंद्रीय थीम ‘नटराज’ भारतीय नृत्य, दर्शन और सृजनात्मक चेतना का दिव्य प्रतीक है। इसी भावभूमि को साकार करते हुए नटराज केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न नृत्य मुद्राओं का समावेश होगा। यह प्रदर्शनी नृत्य की आध्यात्मिक ऊर्जा, लय और गतिशीलता का सजीव संवाद है, जिसमें प्रत्येक कृति नटराज के डमरु की नाद - ध्वनि और चरणों की ताल को अनुभूत कराती है। खजुराहो की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में सजी यह प्रदर्शनी नृत्य प्रेमियों को भारतीय नृत्य कला परम्परा की गहराई से जोड़ते हुए समारोह की थीम को एक सशक्त दृश्य आयाम प्रदान करेगी।
खजुराहो नृत्य समारोह में अनुषांगिक गतिविधियों के क्रम में लयशाला अत्यंत लोकप्रिय एवं सराहनीय गतिविधि है। इस गतिविधि के अंतर्गत भारतीय नृत्य शैलियों यथा कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, कुचीपुड़ी, कथकली, मणिपुरी एवं छाऊ के श्रेष्ठ गुरुओं के सत्र का आयोजन किया जा रहा है। इस सत्र में गुरुओं द्वारा नृत्य कला के शिष्यों एवं नृत्यप्रेमियों से संवाद किया जायेगा, साथ ही प्रदर्शन के माध्यम से नृत्य की परम्परा, तकनीकी पक्ष, भाव पक्ष एवं प्रस्तुतिकरण जैसे विषयों पर बात करेंगे। यह गतिविधि नृत्य के शिष्यों के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी होती है। इस वर्ष भी संस्कृति विभाग द्वारा इस सत्र हेतु देश के सुविख्यात नृत्य गुरुओं को आमंत्रित किया जा रहा है।
अनुषांगिक गतिविधियों के अंतर्गत होने वाला कलावार्ता सत्र, जिसमें कलाविद एवं कलाकारों के मध्य संवाद होता है। इस लोकप्रिय सत्र में नृत्य, भारतीय कलाएं, संस्कृतियां एवं परम्परायें, पुरातत्व, खजुराहो के मंदिरों का स्थापत्य कला, देश के पाषाढ़ शिल्पों इत्यादि पर संवाद किया जाता है। इसके लिये विभाग द्वारा विद्वानों, बुद्धिजीवों एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक लोगों के लिए यह सत्र उपयोगी हो सके।
खजुराहो नृत्य समारोह के माध्यम से संस्कृति विभाग का यह प्रयास होता है कि नृत्य के अलावा अन्य कला विधाओं के बारे में भी आमजन अवगत हो सकें और वर्तमान समय में कलाओं की उत्कृष्टता को समझ सकें। इस उद्देश्य के साथ आर्ट – मार्ट चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के ख्यातिलब्ध चित्रकारों की समकालीन चित्रकला को प्रदर्शित किया जायेगा।