PlayBreaking News

क्या होता है फेमिनिज्म?क्या बोल्डनेस का मतलब सिगरेट-शराब है? शिल्पा शिंदे ने ऐसा क्यों कहा?

शिल्पा शिंदे ने फेमिनिज्म और महिलाओं की लाइफस्टाइल पर अपनी राय रखते हुए कहा कि उन्हें लड़कियों का स्मोकिंग करना पसंद नहीं है। उन्होंने साफ किया कि स्मोकिंग, शराब या खास तरह के कपड़े पहनना किसी महिला को सशक्त या बोल्ड नहीं बनाता।
Follow on Google News
क्या बोल्डनेस का मतलब सिगरेट-शराब है? शिल्पा शिंदे ने ऐसा क्यों कहा?
Ai Generated

मनोरंजन जगत में एक बार फिर फेमिनिज्म (नारीवाद) पर बहस तेज हो गई है। वजह बनी हैं टीवी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने महिलाओं की स्मोकिंग, ड्रिंकिंग और बोल्ड कपड़ों को एम्पावरमेंट यानी सशक्तिकरण से अलग बताया। उनके इस विचार के बाद सोशल मीडिया पर फेमिनिज्म को लेकर तरह-तरह की राय सामने आ रही है।इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर फेमिनिज्म होता क्या है और क्या इसे जीवनशैली से जोड़कर देखा जाना चाहिए?

फेमिनिज्म आखिर है क्या?

फेमिनिज्म का सीधा मतलब है- लिंग के आधार पर बराबरी। यह विचार कहता है कि महिलाओं और पुरुषों को समाज में समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान मिलना चाहिए। इसमें शिक्षा, नौकरी, परिवार, सुरक्षा और निर्णय लेने की आजादी जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।

यह भी पढ़ें: ‘वेलकम टू द जंगल’ पर सेंसर बोर्ड कैंची! 18 कट्स और बदलाव के बाद फिल्म को मिला UA 16+ सर्टिफिकेट

शिल्पा शिंदे का बयान क्यों चर्चा में है?

शिल्पा शिंदे ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें महिलाओं का स्मोक करना पसंद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिकता या निडरता के नाम पर सिगरेट पीना, शराब पीना या खास तरह के कपड़े पहनना उन्हें एम्पावरमेंट नहीं लगता। उन्होंने खुद को थोड़ा रूढ़िवादी बताते हुए कहा कि यह उनकी निजी राय है। उनके मुताबिक, बोल्डनेस का मतलब सिर्फ बाहरी चीजें नहीं हैं, बल्कि असली ताकत सोच और व्यक्तित्व में होती है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि महिलाओं का साड़ी पहनना या पारंपरिक कपड़े पहनना उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन कपड़े किसी महिला की सोच या उसकी ताकत का पैमाना नहीं हो सकते।

शिल्पा शिंदे ने कपड़ों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कपड़े और सोच दो अलग-अलग चीजें हैं और इन्हें आपस में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उन्हें साड़ी पहनना पसंद है, लेकिन यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है, न कि कोई सामाजिक नियम या विचारधारा। उनका कहना था कि हर महिला को अपने हिसाब से कपड़े चुनने की आज़ादी होनी चाहिए, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कपड़े किसी की वैल्यू या उसकी सोच को तय नहीं करते।

फेमिनिज्म और जीवनशैली का टकराव?

सोशल मीडिया पर इस पर दो तरह की राय दिख रही है। एक पक्ष कहता है कि हर महिला को अपने तरीके से जीने की आजादी है- चाहे वह सिगरेट पीए, शराब पीए या वेस्टर्न कपड़े पहने।

दूसरा पक्ष मानता है कि फेमिनिज्म का मतलब केवल बोल्ड दिखना नहीं है, बल्कि अपनी वैल्यूज़ और सोच के साथ खड़ा होना है। 

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts