मुंबइ। भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई है, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया है। सोमवार, 30 मार्च को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला और कुछ ही घंटों में प्रमुख सूचकांक बुरी तरह टूट गए। सेंसेक्स करीब 1000 अंकों की गिरावट के साथ 72,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 300 अंक फिसलकर 22,500 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जुड़े हुए हैं। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी बाजारों में कमजोरी का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा है।
निवेशकों के लिए यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ था। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
आज के कारोबार में शेयर बाजार ने शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई। सेंसेक्स करीब 1.30% गिरकर 72,600 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।निफ्टी भी लगभग 1.30% टूटकर 22,500 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बड़े स्तर पर बिकवाली देखने को मिली। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा, यानी केवल कुछ शेयर ही नहीं बल्कि लगभग सभी सेक्टर्स में कमजोरी नजर आई।
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव कुछ खास सेक्टर्स में देखा गया, जो आमतौर पर बाजार की दिशा तय करते हैं।
ऑटो सेक्टर :
ऑटो कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर के कारण इस सेक्टर में निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
मेटल सेक्टर :
मेटल कंपनियां वैश्विक मांग और कीमतों पर निर्भर होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के चलते इस सेक्टर में भी भारी बिकवाली हुई।
बैंकिंग सेक्टर :
बैंकिंग शेयरों में गिरावट का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बैंकिंग स्टॉक्स से दूरी बनाई।
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मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव :
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इस तरह के हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे इक्विटी बाजार में गिरावट आती है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल :
कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बाजार के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक संकेत मानी जाती है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई और व्यापार घाटे को बढ़ा सकती है, जिससे बाजार पर दबाव बनता है।
ग्लोबल बाजारों का कमजोर रुख :
भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से काफी हद तक प्रभावित होता है।
इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित लेकिन कमजोर रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 3.60% गिरा, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.60% नीचे आया, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग हल्की बढ़त में रहा और चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग स्थिर रहा। यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय स्तर पर भी निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
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भारतीय बाजार पर अमेरिकी बाजारों की चाल का भी गहरा असर पड़ता है। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिका के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए- डाउ जोन्स में 793 अंकों की गिरावट, नैस्डैक 2.15% नीचे और S&P 500 में 1.67% की गिरावट। इससे यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा करती है जैसे- कंपनियों की लागत बढ़ती है, महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और सरकार पर सब्सिडी और राजकोषीय दबाव बढ़ता है। इन सभी कारणों से शेयर बाजार में नकारात्मक माहौल बनता है।
यह पहली बार नहीं है जब बाजार में गिरावट आई हो। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई थी।
लगातार दो सत्रों में गिरावट से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
बाजार में इस तरह की गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समय में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी:
अगर अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर होते हैं, तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन अनिश्चितता बनी रही तो उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
ऐसे समय में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।