लंदन। ब्रिटेन से एक बार फिर शाही परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। किंग चार्ल्स-III के छोटे भाई Andrew Mountbatten-Windsor को सार्वजनिक पद पर रहते हुए कथित गलत बर्ताव यानी misconduct in public office के संदेह में हिरासत में लिया गया है। गुरुवार सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद ब्रिटेन की राजनीति, कानून व्यवस्था और राजशाही तीनों के बीच की जटिल सीमाएं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 8 बजे सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी सैंड्रिंघम एस्टेट स्थित एंड्रयू के घर पहुंचे। शुरुआती औपचारिकताओं के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि, यह कार्रवाई एक विस्तृत जांच के सिलसिले में हुई है, जिसमें उनके पूर्व आधिकारिक दायित्वों से जुड़े फैसलों और आचरण की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों ने फिलहाल जांच के दायरे या सटीक आरोपों पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस का कहना है कि प्रक्रिया जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ महीने पहले ही किंग चार्ल्स-III ने अपने छोटे भाई से ‘प्रिंस’ का खिताब और शाही सम्मान वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी। उस फैसले के तहत विंडसर स्थित उनके लंबे समय से निवास रॉयल लॉज को भी खाली कराने के निर्देश दिए गए थे।
रॉयल लॉज, जहां एंड्रयू 2003 से रह रहे थे, 30 कमरों वाला विशाल निवास है और कभी क्वीन मदर का घर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शाही उपाधियां हटने के बाद एंड्रयू को निजी आवास में रहने की व्यवस्था करने को कहा गया।
Buckingham Palace की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किंग ने शाही उपाधियों, सम्मान और विशेष दर्जे को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की है। बयान में यह भी जोड़ा गया कि यह कदम संवेदनशील है, लेकिन शाही संस्थाओं की साख और सार्वजनिक भरोसे के लिहाज से जरूरी समझा गया।
पैलेस ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा और जांच पूरी होने तक किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
एंड्रयू का नाम लंबे समय से अमेरिकी फाइनेंसर Jeffrey Epstein से जुड़े विवादों में आता रहा है। एपस्टीन पर नाबालिगों के यौन शोषण और तस्करी जैसे गंभीर आरोप थे।
पीड़िता Virginia Giuffre ने दावा किया था कि 2001 में, जब वह नाबालिग थीं, तब एंड्रयू के साथ उनकी मुलाकातें हुईं और उनका शोषण हुआ। एंड्रयू ने इन आरोपों से इनकार किया। हालांकि 2021 में मामला अदालत तक पहुंचा और बाद में एक समझौते के जरिए विवाद का निपटारा हुआ। यह समझौता किसी अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं माना गया।
बकिंघम पैलेस के अनुसार, शाही उपाधियां हटने के बाद अब एंड्रयू को एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के नाम से जाना जाएगा। इससे पहले वे ‘प्रिंस एंड्रयू, ड्यूक ऑफ यॉर्क’ के रूप में पहचाने जाते थे।
‘माउंटबेटन-विंडसर’ नाम 1960 में तय किया गया था, जो महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और उनके पति प्रिंस फिलिप के पारिवारिक नामों का संयोजन है। यह बदलाव प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे शाही विशेषाधिकारों से दूरी का संदेश जाता है।
रॉयल लॉज खाली कराने के फैसले के बाद एंड्रयू को निजी आवास में स्थानांतरित होना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन भी लंबे समय तक वहीं रहती थीं, हालांकि दोनों का तलाक 1996 में हो चुका है।
पैलेस ने स्पष्ट किया कि शाही संपत्तियों का उपयोग अब विशेषाधिकार नहीं रहेगा और आगे रहने की व्यवस्था निजी स्तर पर करनी होगी।
‘Misconduct in public office’ ब्रिटिश कानून में एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें सार्वजनिक पद पर रहते हुए कर्तव्यों का उल्लंघन या शक्ति का दुरुपयोग शामिल हो सकता है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में जांच लंबी हो सकती है और सबूतों, दस्तावेजों व गवाहों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होती है। फिलहाल एंड्रयू के मामले में जांच शुरुआती चरण में बताई जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद ब्रिटेन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ लोग इसे कानून की समानता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि राजशाही की प्रतिष्ठा पर इसका असर पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें पुलिस वाहन एंड्रयू के निवास के बाहर दिखाई दिए। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी दृश्य की पुष्टि नहीं की गई है।
भले ही शाही उपाधियां छीनी गई हों, लेकिन ब्रिटिश उत्तराधिकार की सूची में एंड्रयू अब भी आठवें स्थान पर बताए जाते हैं। उत्तराधिकार का क्रम संवैधानिक नियमों से तय होता है और व्यक्तिगत सम्मान हटने से यह स्वतः समाप्त नहीं होता।
पहले स्थान पर किंग चार्ल्स के बड़े बेटे प्रिंस विलियम हैं, उनके बाद प्रिंस जॉर्ज, प्रिंसेस शार्लेट और प्रिंस लुईस आते हैं। इसके बाद प्रिंस हैरी और उनके बच्चे सूची में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था में राजशाही और कानून के रिश्ते को रेखांकित करता है। राजशाही प्रतीकात्मक है, जबकि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।
पिछले सौ वर्षों में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं, जब किसी शाही सदस्य से ‘प्रिंस’ या ‘प्रिंसेस’ का खिताब हटाया गया हो। इस संदर्भ में मौजूदा कदम को असाधारण माना जा रहा है।