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दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार के लिए सुपरहिट गाने लिखने वाले संतोष आनंद की बेटी शैली आनंद ने की पीपुल्स अपडेट से खास बातचीत

संतोष आनंद ने मनोज कुमार के साथ 12 साल दिन-रात गीतों पर किया काम

प्रीति जैन/भोपाल। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार के निधन की खबर सुनकर हिंदी फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने 87 साल की उम्र में मुंबई में आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से विशेष रूप से प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद गहरे दुख में हैं, वो मनोज कुमार के बेहद करीबी थे। दोनों ने एक साथ 12 वर्षों तक हिंदी सिनेमा को अनगिनत यादगार गीत दिए, जो आज भी सुनने वालों के दिलों में बसे हुए हैं। संतोष आनंद की बेटी शैली आनंद के मुताबिक, उनके पिता ने मनोज कुमार को हमेशा अपना फिल्मी गुरु माना और उनके साथ बिताए गए दिनों को अपनी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण दौर में से एक समझते हैं।

शैली ने कहा कि पापा शुक्रवार को मुंबई रवाना हो गए लेकिन वो बात करने की स्थिति में नहीं हैं। शैली आनंद ने मनोज कुमार और संतोष आनंद के साथ में किए गए काम के अनुभवों को पीपुल्स अपडेट की प्रीति जैन के साथ साझा किया।

मनोज कुमार और संतोष आनंद के बीच था आत्मीय रिश्ता

गीतकार संतोष आनंद और अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार के बीच बेहद गहरा और आत्मीय संबंध था। मनोज कुमार, संतोष आनंद को ‘भारत कुमार’ कहकर संबोधित करते थे। दोनों ने एक साथ 12 वर्षों तक हिंदी सिनेमा के लिए काम किया और कई अमर गीत रचे।

तबियत ठीक न होने के बावजूद अंतिम दर्शन में पहुंचे

जब मनोज कुमार के निधन की खबर संतोष आनंद को मिली, तो वे गहरे शोक में डूब गए। शैली ने बताया कि मनोज कुमार को मेरे पिता संतोष आनंद भारत कुमार भी कहते थे। जब उन्हें मनोज अंकल के निधन की खबर मिली तो वे चुपचाप बैठ गए और किसी अपने के जाने पर दुख की जो तीव्रता महसूस होती है, वो उनके चेहरे पर थी।

उनकी बेटी शैली के अनुसार, उनके पिता बात करने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने के बावजूद मनोज कुमार के अंतिम दर्शन के लिए मुंबई की यात्रा की।

संतोष आनंद ने मनोज कुमार के लिए कौन-कौन से गीत लिखे

संतोष आनंद ने मनोज कुमार की कई सुपरहिट फिल्मों के लिए गीत लिखे, जिनमें पूरब और पश्चिम, शोर, रोटी-कपड़ा और मकान व क्रांति प्रमुख है। इन फिल्मों के ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी…’, ‘एक प्यार का नगमा है…’, ‘पुरबा सुहानी आई रे…’ और ‘मैं ना भूलूंगा, मैं ना भूलंगी…’ को काफी प्रसिद्धि मिली।

कैसे हुई मनोज कुमार और संतोष आनंद की पहली मुलाकात

1969 में फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ की शूटिंग के दौरान मनोज कुमार दिल्ली आए थे। वहां, संतोष आनंद के एक मित्र ने उनकी लिखी कुछ कविताएं मनोज कुमार को सुनाईं। कविता सुनकर मनोज कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने संतोष आनंद को मुंबई बुला लिया। तब संतोष आनंद दिल्ली की सरकारी लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत थे और कवि के रूप में पहचाने जाते थे।

मनोज कुमार और संतोष आनंद के बीच प्रगाढ़ संबंध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मनोज कुमार ने 1989 में एक फिल्म बनाई, जिसका नाम ही उन्होंने ‘संतोष’ रखा।

12 सालों तक कड़ी मेहनत से मनोज कुमार के लिए लिखे गीत

1969 से 1981 तक संतोष आनंद ने विशेष रूप से मनोज कुमार के लिए ही कार्य किया। वे दिन-रात गीतों पर काम करते थे और इस दौरान संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल भी उनके साथ रहते थे। कभी-कभी वे 24-24 घंटे लगातार कार्य करते थे ताकि सर्वश्रेष्ठ गीत तैयार किए जा सकें।

शैली के मुताबिक, उनके पिता ने मनोज कुमार के निधन पर कहा, “आज मैं एक बार फिर अकेला महसूस कर रहा हूँ।”

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