Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

सातवीं कक्षा के अस्तित्व को धुएं से एलर्जी थी, इसलिए स्मोक और वेपन डिटेक्टर युक्त बस का बनाया मॉडल

रवींद्र भवन में 31वीं नेशनल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस शुरू, देश-विदेश से आए 700 से अधिक स्टूडेंट्स
सातवीं कक्षा के अस्तित्व को धुएं से एलर्जी थी, इसलिए स्मोक और वेपन डिटेक्टर युक्त बस का बनाया मॉडल

मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से स्कूली छात्रों के लिए 31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। रवींद्र भवन में आयोजित इस साइंस कांग्रेस में देश के विभिन्न राज्यों के करीब 700 स्टूडेंट्स के साथ ही गल्फ कॉपरेटिव काउंसिल के देश बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, कतर एवं सऊदी अरब के स्टूडेंट्स भी भाग ले रहे हैं। विभिन्न राज्यों और देशों से आए स्टूडेंट्स ने अलग-अलग सेशन में विभिन्न विषयों पर रिसर्च पेपर पेश किए और उनका प्रेजेंटेशन दिया।

इसमें स्टूडेंट्स ने समस्याओं के साथ उनके समाधान भी पेश किए। वहीं, भोपाल के कई स्कूलों के बच्चों ने साइंस मॉडल बनाकर अपने स्टॉल पर प्रस्तुत किए। साथ ही वीर भारत न्यास की ऋषि वैज्ञानिक परंपरा आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें विभिन्न ऋषि-मुनियों द्वारा किए गए नवाचार दिखाए गए।

मिट्टी उर्वरता की चिंता पर रिसर्च पेपर

वहीं, निशा शाह के संयोजन में कतर के चार बच्चे आए। इन बच्चों ने बायो फर्टिलाइजर का पेपर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया, जो इको फ्रेंडली सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश हो हर जगह मृदा संरक्षण बेहद आवश्यक है, इसलिए हमने बायोफर्टिलाइजर के कॉन्सेप्ट को अपने पेपर प्रेजेंटेशन में शामिल किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले समय में सॉइल पॉल्यूशन भी एक चिंता का विषय बनने वाला है। उपजाऊ जमीन लगातार केमिकल्स के इस्तेमाल से अपनी उर्वरता खोती जा रही है।

हादसा होने पर स्विच दबाते ही पहुंच जाएगी एंबुलेंस

मुझे स्मोक और डस्ट से एलर्जी होती है। एक बार मैं बस में ट्रेवल कर रहा था, उसी समय किसी ने स्मोक किया तो मुझे एलर्जी होने लगी। मैंने सोचा कि बस में ऐसा कुछ होना चाहिए, जिससे किसी के स्मोक करते ही उसके बारे में पता लग जाए और उसे ऐसा करने से रोका जा सके। इसके बाद मैंने एक मॉडल बनाया, जिसमें स्मोकिंग करते ही अलार्म बजने लग जाएगा। बस के गेट पर मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरा भी लगा होगा, ताकि कोई व्यक्ति हथियार लेकर चढ़े तो बस का अलार्म बजेगा और ड्राइवर को उसके बारे में पता लग जाएगा। साथ ही हमारे आस-पास सड़क क्रॉस करते समय कई हादसे होते हैं, इसलिए क्रॉसिंग के पास एक स्विच लगाएंगे, जिसे दबाते ही कंट्रोल रूम में सिग्नल चला जाएगा, जिससे तत्काल एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाएगी। - अस्तित्व शुक्ला, 7वीं कक्षा, केवी-1

सी-बकथॉर्न बेरीज से मिलेगा पोषण

मैंने बैलेंसिंग द मिड-डे मील पर रिसर्च पेपर तैयार किए हैं। इस समय में लद्दाख के मिड-डे मील में दाल, चावल मिलती है, जिससे बच्चों को पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रिशंस नहीं मिल पा रहे हैं। इस वजह से स्टूडेंट्स बीमार हो रहे हैं। इसको लेकर हमने 100 स्टूडेंट्स पर रिसर्च की, जिसमें कई स्टूडेंट्स में जॉइंट पेन, नाक में से खून आना जैसे बीमारियों की बात सामने आई। डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स ने भी इस बात को माना। मैंने न्यूट्रिशन और आयरन को बढ़ाने के लिए स्थानीय हर्ब्स और बेरीज को शामिल करते हुए एक बैलेंसिंग मिड-डे मील डाइट तैयार की है। इसमें हमने सबसे मुख्य रूप से सी-बकथॉर्न बेरीज शामिल की हैं, जिसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन और विटामिन-सी होता है। - तनवीर अहमद, स्टूडेंट, कारगिल, लद्दाख

People's Reporter
By People's Reporter

Latest Posts