
भोपाल में आयोजित लिवर और संक्रमण पर आधारित कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया और खासकर व्हाट्सएप से मिली अधूरी जानकारी के आधार पर दवा लेना अब लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। छोटी-छोटी बीमारियों में खुद से एंटीबायोटिक लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है जिसका सीधा असर लिवर की सेहत पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बिना डॉक्टर की सलाह के ली गई दवाएं लिवर में टॉक्सिक मेटाबोलिज्म पैदा करती हैं, जिससे ड्रग इंड्यूस्ड लिवर इंजरी का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना के बाद ऐसे मामलों में तेजी आई है जहां दवाओं के ओवरडोज से लिवर सेल्स को नुकसान पहुंचा है। भोपाल के होटल जहानुमा पैलेस में आयोजित कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए डॉक्टरों ने बताया कि अब लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर दवा के नाम देखकर खुद ही इलाज शुरू कर देते हैं जो लंबे समय में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
पिछले 15 सालों में लिवर रोगों का पैटर्न तेजी से बदला है। पहले जहां शराब से जुड़ी बीमारियां ज्यादा होती थीं अब 72 से 90 प्रतिशत तक मरीज नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के सामने आ रहे हैं। यह बदलाव खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से जुड़ा हुआ है। साथ ही हेपेटाइटिस-बी के बढ़ते मामले और एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
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विशाखापत्तनम के डॉ. चलपति राव अचांता ने कहा कि लोग हल्के बुखार, लूज मोशन या अन्य सामान्य लक्षणों में भी खुद से दवा लेने लगते हैं जिससे बीमारी और बढ़ जाती है।

हैदराबाद के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।

नई दिल्ली के डॉ. एसपी मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में लोग खुद डॉक्टर बनने लगे हैं जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल न केवल लिवर को नुकसान पहुंचाता है बल्कि दवाओं की प्रभावशीलता भी कम कर देता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना शरीर के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। इससे लिवर पर लगातार दबाव पड़ता है और समय के साथ यह गंभीर बीमारी में बदल सकता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है। साथ ही किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। अगर पीलिया, उल्टी, कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत मेडिकल सलाह लेनी चाहिए।