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सीहोर में सड़क के गड्ढे ने ली गर्भवती की जान, सकल समाज ने मांगा मुआवजा और पति को सरकारी नौकरी

सीहोर में सड़क के गड्ढे में बाइक गिरने से गर्भवती महिला की मौत के बाद समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। परिवार को मुआवजा, पति को नौकरी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
सीहोर में सड़क के गड्ढे ने ली गर्भवती की जान, सकल समाज ने मांगा मुआवजा और पति को सरकारी नौकरी
सीहोर के सकल समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

सीहोर। सड़क के गहरे गड्ढे ने बुधवार 28 अक्टूबर को एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं थी। भोपाल-इंदौर हाईवे पर डी मार्ट के पास सड़क किनारे बने गड्ढे में बाइक का पहिया उतरने से 24 वर्षीय गर्भवती महिला रक्षा सोनानिया की जान चली गई। हादसे में उसका दो वर्षीय बेटा और पति भी घायल हुए।

मामला सामने आने के बाद सीहोर के सकल समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, बच्चों की मुफ्त शिक्षा और मृतका के पति को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस गड्ढे के कारण आठ दिन पहले भी श्रद्धालुओं से भरा ऑटो पलटने की बात सामने आई थी, उसे समय रहते दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?

गड्ढे में उतरा बाइक का पहिया और गई जान

जानकारी के अनुसार, शाजापुर जिले के ग्राम अरनिया कलां निवासी आयुष सोनानिया अपनी गर्भवती पत्नी रक्षा और दो वर्षीय बेटे के साथ बाइक से सीहोर आ रहे थे। रक्षा की सोनोग्राफी करानी थी। इसी दौरान डी मार्ट के आगे सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में बाइक का पहिया उतर गया।

अचानक लगे झटके से बाइक अनियंत्रित हो गई और रक्षा अपने मासूम बेटे के साथ सड़क पर गिर पड़ी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने रक्षा को मृत घोषित कर दिया। एक हादसे ने परिवार से मां और गर्भस्थ शिशु की खुशियां छीन लीं।

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8 दिन पहले हादसे के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार

इस घटना ने सड़क की बदहाल स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इसी गड्ढे के कारण करीब आठ दिन पहले श्रद्धालुओं से भरा एक सवारी ऑटो भी पलट गया था। उस हादसे में दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई है।

इसके बावजूद यदि गड्ढे की समय रहते मरम्मत नहीं हुई, तो यह जांच का विषय है कि शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सवाल यह भी है कि सड़क की नियमित निगरानी और खतरनाक स्थानों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों ने क्या कदम उठाए?

शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने का आरोप

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई थी। पूर्व पार्षद अनूप चौधरी के नेतृत्व में लोगों ने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि गड्ढे की मरम्मत के लिए कई बार लिखित शिकायतें दी गईं।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दो बार शिकायत दर्ज कराने की बात कही गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। हालांकि, इन शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लोगों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि समय रहते सड़क दुरुस्त हो जाती, तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।

मौके पर पहुंचकर कराया गया गड्ढे का सुधार

चक्काजाम की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी गिरीश दुबे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर भी घटनास्थल पर पहुंचे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने पास में आरएके कॉलेज की बाउंड्रीवॉल का निर्माण कर रहे कारीगरों को बुलवाकर गड्ढे की मरम्मत शुरू कराई। पैचवर्क के बाद जाम खुलवाया गया। घटना के बाद तत्काल सुधार की कार्रवाई हुई, लेकिन इससे यह सवाल खत्म नहीं होता कि खतरनाक गड्ढे को हादसे से पहले क्यों नहीं भरा गया।

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कलेक्टर को ज्ञापन, बच्चों की शिक्षा और परिवार के भविष्य की चिंता

सीहोर समाज ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में मृतका के दोनों बच्चों की मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करने, पति को शासकीय नौकरी देने और परिवार के भरण-पोषण के लिए उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है।

समाज ने दोनों बच्चों के नाम पर सरकारी स्तर पर 10-10 लाख रुपये की एफडी कराने का भी आग्रह किया है। इसके साथ ही इंदौर नाके से सोया चौपाल तक सड़क निर्माण कराने वाली कंपनी के काम की निष्पक्ष जांच कराकर दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारियों का निर्धारण करने की मांग रखी गई है।

सिर्फ गड्ढा भरना काफी नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो

ज्ञापन में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की खराब सड़कों का निरीक्षण कराने, गड्ढों की तत्काल मरम्मत करने तथा दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा संकेतक लगाने की मांग भी शामिल है। समाज का कहना है कि उद्देश्य किसी पर बेवजह आरोप लगाना नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।

अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल सड़क सुधारने की नहीं, बल्कि शिकायतों की जांच, निर्माण गुणवत्ता की पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने की भी है। पीड़ित परिवार को राहत मिलेगी या नहीं और सड़क निर्माण से जुड़े मामलों में क्या कार्रवाई होगी, इस पर अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

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