सीहोर: लिखित जांच के भरोसे थमी एनएसयूआई की भूख हड़ताल, 15 दिन में कार्रवाई नहीं तो फिर आर-पार की लड़ाई

सीहोर। जनभागीदारी मामले को लेकर पिछले चार दिनों से चल रही एनएसयूआई की भूख हड़ताल गुरुवार को प्रशासन के लिखित जांच के आश्वासन के बाद 15 दिनों के लिए स्थगित कर दी गई। आंदोलन स्थल पर पहुंचे जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया और कार्यकर्ताओं को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। हालांकि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि प्रशासन को कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा दे दी गई है। एनएसयूआई ने दो टूक चेतावनी दी है कि 15 दिनों के भीतर आश्वासन के अनुरूप जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन दोबारा भूख हड़ताल शुरू करेगा।
चौथे दिन प्रशासन को घेरा
जनभागीदारी मामले को लेकर एनएसयूआई लगातार प्रशासन के सामने अपनी मांग उठा रही थी। आंदोलन के चौथे दिन भी कार्यकर्ता धरना स्थल पर डटे रहे। संगठन का कहना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे में पारदर्शी जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई जरूरी है। लगातार आंदोलन के बाद प्रशासन की ओर से लिखित जांच का आश्वासन मिलने पर फिलहाल भूख हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
लिखित आश्वासन बना आंदोलन रोकने की वजह
एनएसयूआई ने साफ किया कि केवल मौखिक भरोसे पर आंदोलन खत्म नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से लिखित रूप में जांच का आश्वासन मिलने के बाद 15 दिनों की मोहलत दी गई है। संगठन अब इस अवधि में होने वाली कार्रवाई पर नजर रखेगा। एनएसयूआई नेताओं ने संकेत दिया कि यदि जांच केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह गई तो आंदोलन पहले से ज्यादा आक्रामक तरीके से शुरू किया जाएगा।
कांग्रेस ने आंदोलन को दिया खुला समर्थन
भूख हड़ताल स्थल पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने एनएसयूआई के आंदोलन को समर्थन देते हुए छात्रों के हित से जुड़े मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। इस दौरान आंदोलन स्थल पर कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह राजनीतिक तेवर में दिखाई दिया।
गुजराती ने जूस पिलाकर खत्म कराया अनशन
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया और यश यादव को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इसके साथ ही चौथे दिन से चल रही भूख हड़ताल को औपचारिक रूप से स्थगित कर दिया गया। हालांकि कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यह स्थायी वापसी नहीं है, बल्कि प्रशासन को दिए गए समय के भीतर कार्रवाई देखने के लिए आंदोलन को अस्थायी रूप से रोका गया है।
15 दिन की मोहलत, फिर आंदोलन का अल्टीमेटम
एनएसयूआई ने प्रशासन को 15 दिनों की सीधी मोहलत दी है। संगठन का कहना है कि इस अवधि में यदि जनभागीदारी मामले में लिखित आश्वासन के अनुरूप जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो कार्यकर्ता फिर सड़क पर उतरेंगे। यानी प्रशासन के सामने अब महज आश्वासन निभाने की चुनौती नहीं, बल्कि आंदोलन को दोबारा भड़कने से रोकने की जिम्मेदारी भी है।
‘संघर्ष जारी रहेगा’, सिसोदिया का ऐलान
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया ने कहा कि छात्रों के हित और न्यायपूर्ण कार्रवाई के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना है कि भूख हड़ताल स्थगित हुई है, समाप्त नहीं। यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा। इस दौरान एनएसयूआई और कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
ये भी पढ़ें: 21 दिन से स्वामित्व योजना का काम ठप; 24 हजार पटवारी सरकार से सीधे टकराव में, रीवा में 15 सस्पेंड
अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
चार दिन तक चले आंदोलन के बाद फिलहाल टकराव टल गया है, लेकिन मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ। 15 दिनों की समयसीमा अब प्रशासन की कार्रवाई की कसौटी बनेगी। यदि जांच आगे बढ़ती है तो आंदोलन का रास्ता बंद हो सकता है, लेकिन आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो एनएसयूआई के दोबारा मोर्चा खोलने की चेतावनी पहले ही सामने आ चुकी है।




















