डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.65 लाख का वित्तीय घोटाला, IFMIS के जरिए अनियमित भुगतान; 3 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के घेरे में

डिंडौरी। आयुक्त, कोष एवं लेखा मप्र भोपाल की ओर से 24 नवंबर 2025 को भेजी गई संदिग्ध भुगतानों की सूची के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच दल गठित किया गया था। जांच रिपोर्ट में IFMIS के जरिए बिना आवश्यक परीक्षण और सत्यापन के फर्जीवाड़ा किए जाने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने कार्रवाई शुरू करते हुए तीन अधिकारियों-कर्मचारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है।
संदिग्ध भुगतानों की सूची के बाद खुला मामला
आयुक्त, कोष एवं लेखा मप्र भोपाल द्वारा 24 नवंबर 2025 को भेजी गई संदिग्ध भुगतानों की सूची के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच दल ने विस्तृत जांच की। जांच में वर्ष 2017 से 2024 के बीच वेतन, एरियर और विभिन्न देयकों में अनियमित और अधिक भुगतान सामने आया। जांच रिपोर्ट में कुल 60 लाख 65 हजार 590 रुपये के वित्तीय घोटाले की पुष्टि हुई है।
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IFMIS के जरिए बिना सत्यापन किए भुगतान
जांच में सामने आया कि IFMIS यानी एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली के माध्यम से बिना आवश्यक परीक्षण और सत्यापन के यह फर्जीवाड़ा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार भुगतान प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और अनियमित तरीके से देयकों को आगे बढ़ाया गया। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
लेखा प्रभारी गुलाब प्रसाद साहू निलंबित
तत्कालीन लेखा प्रभारी और Verifier गुलाब प्रसाद साहू को मप्र सिविल सेवा (CCA) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साहू पर पात्रता जांचे बिना और सक्षम स्वीकृति के अभाव में देयकों को आगे बढ़ाने का आरोप है। जांच में उन्हें मामले के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों में शामिल किया गया है।
डॉ. रमेश मरावी को कारण बताओ नोटिस
22 मार्च 2021 से 14 अगस्त 2025 तक प्रभारी CMHO और Approver रहे प्रथम श्रेणी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रमेश मरावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डॉ. मरावी पर बिना मिलान किए अनियमित भुगतानों को हरी झंडी देने और कदाचरण का आरोप है। वहीं IFMIS में Creator की भूमिका निभा रहे सुपरवाइजर प्रकाश सिंह परस्ते के विरुद्ध भी निलंबन का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया है।
अन्य अधिकारियों पर भी विधिक कार्रवाई प्रस्तावित
सुपरवाइजर प्रकाश सिंह परस्ते पर बिना वैध दस्तावेजों के बिल सिस्टम में दर्ज करने का आरोप है। प्रशासन के अनुसार घोटाले की अवधि में पदस्थ रहे सेवानिवृत्त डॉ. बलदेव सिंह भलावी, दिवंगत डॉ. भरत सिंह टेकाम और अन्यत्र स्थानांतरित डॉ. आर.के. मेहरा के विरुद्ध भी नियमानुसार अलग से विधिक कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही जिले के प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।




















