Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

IRGC ने फिर दी होर्मुज में इंटरनेट केबल काटने की धमकी, असर ईरान के पड़ोसियों पर ज्यादा

IRGC के राजनीतिक उप-प्रमुख यादुल्लाह जवानी ने चेतावनी दी कि बुनियादी ढांचे पर हमले पर होर्मुज जलडमरूमध्य की केबलों को निशाना बनाया जाएगा, ICPC के अनुसार यहां से 5 एक्टिव सबमरीन केबल गुजरती हैं जो दुनिया की 1% से भी कम इंटरनेशनल बैंडविड्थ ले जाती हैं।
IRGC ने फिर दी होर्मुज में इंटरनेट केबल काटने की धमकी, असर ईरान के पड़ोसियों पर ज्यादा
IRGC ने फिर दी होर्मुज में इंटरनेट केबल काटने की धमकी।

तेहरान। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को टारगेट करने की धमकी दी है। हालांकि इस जलमार्ग से दुनिया के इंटरनेट ट्रैफिक का बहुत छोटा हिस्सा गुजरता है, लेकिन अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचा तो इसका असर कई देशों पर पड़ेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका सबसे गंभीर असर ईरान के पड़ोसी देशों पर होगा। हालांकि ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी पर इसका असर काफी कम रहेगा। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक उप-प्रमुख यादुल्लाह जवानी ने इस हफ्ते चेतावनी दी कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद अहम इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है।

होर्मुज में एक रात में 7 टैंकरों को नुकसान! ईरान की अमेरिका को चेतावनी, तेल सप्लाई पर बढ़ा खतरा

इंटरनेट केबल कटी तो किस पर असर पड़ेगा

इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमिटी (ICPC) के हवाले से 'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पांच एक्टिव सबमरीन केबल गुजरती हैं। ये सभी मिलकर दुनिया की कुल इंटरनेशनल बैंडविड्थ का 1% से भी कम हिस्सा कैरी करती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यूरोप और पूर्वी एशिया को जोड़ने वाले मुख्य डेटा रूट लाल सागर (Red Sea) से होकर गुजरते हैं। इसका मतलब है कि अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो इंटरनेट पर कोई विनाशकारी असर नहीं पड़ेगा।

Persian Gulf के देशों को सर्विस देती हैं

'टेलीजियोग्राफी' (TeleGeography) के मुताबिक, ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक विवादों और खराब रिश्तों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली इन केबलों को ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर निकाला गया है। ये केबल मुख्य रूप से फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के देशों को सर्विस देती हैं। इसलिए अगर इन पर हमला होता है, तो इसका सीधा खतरा ग्लोबल इंटरनेट के बजाय रीजनल कनेक्टिविटी पर ज्यादा होगा। केबलों को नुकसान पहुंचने से बहरीन, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इंटरनेशनल कनेक्टिविटी बाधित हो सकती है। हालांकि इन चारों देशों के पास जमीन के रास्ते अन्य कनेक्शन भी मौजूद हैं। सऊदी अरब फारस की खाड़ी के केबल रूट्स पर कम निर्भर है, क्योंकि इसकी अधिकांश इंटरनेशनल बैंडविड्थ लाल सागर तट पर स्थित सिस्टम्स के जरिए चलती है।

केबल कटने से ग्लोबल इंटरनेट बंद क्यों नहीं होता

ग्लोबल इंटरनेट किसी एक नेटवर्क या किसी एक फेल्योर पॉइंट पर निर्भर नहीं करता। टेलीकॉम ऑपरेटर डेटा ट्रांसफर के लिए कई अंडरसी और जमीनी रूट्स का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए अगर ईरान इंटरनेट काट देता है, तो वे कुछ ट्रैफिक को दूसरी लाइनों के जरिए री-रूट कर सकते हैं। री-रूटिंग से स्पीड धीमी हो सकती है, लेटेंसी बढ़ सकती है या कुछ सर्विसेज में रुकावट आ सकती है। लेकिन, यूजर्स पूरी तरह से डिस्कनेक्ट नहीं होंगे। इसका मतलब है कि पेज लोड होने में ज्यादा समय लग सकता है, वीडियो बफर हो सकते हैं और सोशल मीडिया टाइमलाइन रिफ्रेश करते समय ध्यान देने योग्य देरी हो सकती है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

Latest Posts