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सीहोर में बांग्लादेशी नागरिक को 7 साल की सजा, बिना वीजा-पासपोर्ट रह रहा था भारत में

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में सीहोर की प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बिना वैध वीजा और पासपोर्ट भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद इरशाद को सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने विदेशी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए वर्षों तक भारत में अवैध रूप से निवास किया। इस फैसले को अवैध घुसपैठ के मामलो
सीहोर में बांग्लादेशी नागरिक को 7 साल की सजा, बिना वीजा-पासपोर्ट रह रहा था भारत में
सीहोर में बांग्लादेशी नागरिक को 7 साल की सजा

सीहोर। 27 अप्रैल 2025 को कोतवाली पुलिस को गोपनीय सूचना मिली कि इंदिरा नगर टप्पर क्षेत्र में एक बांग्लादेशी नागरिक पहचान छिपाकर रह रहा है। थाना प्रभारी के निर्देश पर उपनिरीक्षक विक्रम आदर्श पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। संदिग्ध से पूछताछ शुरू होते ही पूरा मामला सामने आ गया और पुलिस ने तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

पूछताछ में खुद कबूल किया जुर्म

पूछताछ के दौरान मोहम्मद इरशाद ने स्वीकार किया कि वह करीब 15 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आया था। पहले राजस्थान के अजमेर में कई वर्षों तक रहा और बाद में सीहोर आकर बस गया। जब उससे वीजा, पासपोर्ट या भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

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बांग्लादेशी दस्तावेजों ने खोली सच्चाई

जांच के दौरान आरोपी के पास से जन्म प्रमाणपत्र और परिजनों के पहचान दस्तावेज मिले, जो बांग्ला भाषा में थे। पुलिस ने भाषा विशेषज्ञ से उनका अनुवाद कराया, जिसमें दस्तावेज बांग्लादेश के होने की पुष्टि हुई। इसके बाद सभी दस्तावेज जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

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मोबाइल, आधार और पैन कार्ड की भी हुई पड़ताल

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर साइबर फोरेंसिक लैब भोपाल भेजा। उसके पास मिले आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य भारतीय पहचान दस्तावेजों की भी संबंधित विभागों से जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने विदेशी अधिनियम के तहत आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।

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अभियोजन की मजबूत पैरवी,अदालत ने सुनाया फैसला

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया ने प्रभावी पैरवी करते हुए पुलिस जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों को कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया। अदालत ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी को विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14-क के तहत दोषी करार दिया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। 

Edited By: Rohit Sharma

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...Read More

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