असम में बालाघाट का लाल शहीद, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

बालाघाट। 4 अगस्त को असम के सीआरपीएफ कैंप में हुई फायरिंग की घटना में हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल शहीद हो गए। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद विष्णु बघेल अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और परिवार में पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
सीआरपीएफ कैंप में हुई गोलीबारी बनी त्रासदी
जानकारी के अनुसार 4 अगस्त की सुबह असम के नागांव जिले स्थित सीआरपीएफ की 34वीं बटालियन के कैंप में एक जवान ने अचानक अपनी इंसास राइफल से बैरक और क्वार्टर गार्ड की ओर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस दर्दनाक घटना में हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल सहित दो जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आरोपी जवान ने खुद को भी गोली मार ली। गंभीर रूप से घायल विष्णु बघेल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

हाल ही में हुआ था असम तबादला
बताया जा रहा है कि हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल का हाल ही में भोपाल स्थित 107वीं बटालियन से असम की 34वीं बटालियन में तबादला हुआ था। देश सेवा के प्रति समर्पित विष्णु बघेल अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे थे। अचानक हुई इस घटना ने उनके परिवार के साथ-साथ पूरे बालाघाट जिले को गहरे सदमे में डाल दिया। उनकी शहादत की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
गुरुवार को जैसे ही शहीद विष्णु प्रसाद बघेल का पार्थिव शरीर पैतृक गांव भीकेवाड़ा (शेरपार) पहुंचा, पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भारत माता की जय और अमर रहे के नारों के बीच नम आंखों से लोगों ने अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद विष्णु प्रसाद बघेल अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके पिता लंबे समय से बीमार हैं, जबकि माता कैंसर का उपचार करा रही हैं। ऐसे कठिन समय में परिवार पर यह असहनीय आघात टूट पड़ा है। विष्णु बघेल की शहादत ने पूरे बालाघाट जिले को गर्व के साथ-साथ गहरे शोक में डुबो दिया है। देश सेवा में दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के रूप में याद किया जाएगा।











