हरदा में खाद संकट गहराया, यूरिया-डीएपी के लिए किसानों की लंबी कतारें; कांग्रेस ने कृषि विभाग से की पारदर्शी वितरण व्यवस्था की मांग

हरदा जिले में खरीफ सीजन के बीच यूरिया और डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। खाद लेने के लिए किसानों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद कई किसानों को बिना खाद के ही लौटना पड़ रहा है। दूसरी ओर कृषि विभाग का दावा है कि जिले में खाद का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
पीओएस मशीन की तकनीकी दिक्कत से वितरण प्रभावित
जानकारी के अनुसार पीओएस (POS) मशीनों में तकनीकी खराबी के कारण एमपी एग्रो और डीएमओ केंद्रों से खाद वितरण फिलहाल प्रभावित है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी समस्या दूर होते ही वितरण व्यवस्था फिर से शुरू कर दी जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने डीडीए से की मुलाकात
खाद संकट को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन साईं, उपाध्यक्ष रविशंकर शर्मा और महासचिव सूरजसिंह राजपूत ने गुरुवार को उप संचालक कृषि (डीडीए) प्रकाश ठाकुर से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था को सरल एवं पारदर्शी बनाने की मांग उठाई।
दो महीने से कर रहे मांग, नहीं मिला समाधान
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन साईं ने कहा कि पिछले दो महीनों से ज्ञापन और पत्रों के माध्यम से प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है लेकिन अब तक इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।
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80 हजार हेक्टेयर से अधिक मक्का फसल पर संकट
मोहन साईं ने बताया कि इस वर्ष हरदा जिले में 80 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मक्का की खेती की गई है। ऐसे समय पर किसानों को यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता है। यदि समय पर खाद नहीं मिली तो मक्का की फसल पर गंभीर असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
'कृषि कल्याण वर्ष' पर उठाए सवाल
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार इस वर्ष को 'कृषि कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है, वहीं दूसरी ओर किसान खाद के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही कृषि कल्याण वर्ष की वास्तविक तस्वीर है?
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कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से की मांग
जिले में किस दुकान पर कितनी मात्रा में यूरिया और डीएपी उपलब्ध है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। खाद वितरण पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसानों को भटकना न पड़े। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के ऐसे किसानों को भी खाद उपलब्ध कराई जाए जिनके पास खेती की जमीन तो है लेकिन भूमि के पट्टे नहीं हैं। कांग्रेस का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें प्रभावित होंगी और किसानों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी।
Edited By: Sumit Shrivastava











