SC-OBC छात्रों को बड़ी राहत!स्कॉलरशिप के लिए नहीं देना होगा डोमिसाइल सर्टिफिकेट, 1.2 करोड़ विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा

केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों छात्रों को बड़ी राहत दी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) ने अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए चल रही प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब इन स्कॉलरशिप योजनाओं का लाभ लेने के लिए छात्रों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट यानी मूल निवास प्रमाण पत्र जमा करने की जरूरत नहीं होगी।
सरकार के इस फैसले से देशभर के करीब 1.2 करोड़ छात्रों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार ने UMANG प्लेटफॉर्म पर ‘SETU’ नाम का नया डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है, जिससे स्कॉलरशिप से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी।
क्या होता है डोमिसाइल सर्टिफिकेट?
डोमिसाइल सर्टिफिकेट एक सरकारी दस्तावेज होता है, जो यह साबित करता है कि कोई व्यक्ति किस राज्य या क्षेत्र का स्थायी निवासी है। अब तक SC और OBC छात्रों को स्कॉलरशिप आवेदन के समय यह प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य था।
कई छात्रों को इस दस्तावेज को बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। खासकर वे छात्र जो पढ़ाई के लिए अपने गृह राज्य या जिले से बाहर रहते हैं, उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार छात्रों को सिर्फ प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपने घर वापस जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होते थे।
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छात्रों की परेशानी को देखते हुए लिया फैसला
सरकार का कहना है कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म करने का उद्देश्य छात्रों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना है। इससे आवेदन प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और तेज होगी। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, कई योग्य छात्र केवल दस्तावेजी दिक्कतों के कारण समय पर स्कॉलरशिप का लाभ नहीं ले पाते थे। अब यह बाधा दूर हो जाएगी और पात्र छात्रों तक सरकारी सहायता आसानी से पहुंच सकेगी।
देश में कितने SC-OBC छात्र कर रहे हैं पढ़ाई?
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 4.13 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें करीब 58 लाख छात्र अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आते हैं, जबकि लगभग 1.47 करोड़ छात्र अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं।
नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) और जनगणना के माइग्रेशन डेटा के मुताबिक, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 30 से 35 प्रतिशत छात्र अपने गृह जिले या राज्य से बाहर जाकर पढ़ाई करते हैं। ऐसे छात्रों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सबसे अधिक कठिनाई होती थी।
किन छात्रों को मिलता है प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ?
प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को स्कूल स्तर पर पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है। SC वर्ग के लिए यह योजना कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों को कवर करती है। इस योजना का लाभ उन परिवारों के बच्चों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है। इस स्कॉलरशिप के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी आवश्यक जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
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पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप से उच्च शिक्षा को मिलता है सहारा
पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना उन छात्रों के लिए है जो 10वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके तहत इंटरमीडिएट, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी तक की पढ़ाई के लिए सहायता दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी छात्र अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े।
OBC छात्रों के लिए भी मिलती हैं विशेष स्कॉलरशिप
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए भी प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक दोनों प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जाती हैं। प्री-मैट्रिक योजना के लिए पारिवारिक आय सीमा 2.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित है। वहीं पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए आय सीमा 1 लाख रुपए सालाना तय की गई है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर OBC छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना है।
UMANG पर लॉन्च हुआ ‘SETU’ पोर्टल
डोमिसाइल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म करने के साथ-साथ सरकार ने डिजिटल सुविधा को भी मजबूत किया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने UMANG ऐप और पोर्टल पर ‘SETU’ (Scholarship for Educational Transformation and Upliftment) नाम का नया प्लेटफॉर्म शुरू किया है। यह एक सिंगल-विंडो सिस्टम है, जहां छात्र स्कॉलरशिप से जुड़ी लगभग सभी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
अब छात्रों को अलग-अलग वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं होगी। SETU पोर्टल के जरिए छात्र आवेदन कर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं, आवेदन की स्थिति देख सकते हैं और स्कॉलरशिप से जुड़ी अन्य जानकारियां भी प्राप्त कर सकते हैं।
डिजिटल इंडिया को मिलेगा और बल
सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाओं को सरल बनाने से छात्रों को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा।











