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सोहागपुर:अब 1 अक्टूबर को खुलेंगे मढ़ई के गेट, कोर जोन में जाने पर लगेगी पाबंदी

मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में पर्यटन स्थल मढ़ई के कोर क्षेत्र में आज मंगलवार को पर्यटन का आखिरी दिन रहेगा। कल बुधवार से यहां सैलानी जंगल सफारी का आनंद नहीं ले सकेंगे। अब बारिश बाद यानि आगामी 1 अक्टूबर को हर साल की तरह मढ़ई के प्रवेश द्वार फिर से पर्यटकों के लिए खोले जाएंगे।
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अब 1 अक्टूबर को खुलेंगे मढ़ई के गेट, कोर जोन में जाने पर लगेगी पाबंदी

सोहागपुर। मढ़ई में आज के बाद वर्षा काल के दौरान कोर क्षेत्र में पर्यटन पूरी तरह बंद रहेगा, जबकि बफर क्षेत्र में जंगल सफारी जारी रहेगी। बारिश का मौसम वन्यजीवों के नैसर्गिक जीवन, प्रजनन और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिजर्व प्रबंधन ने इस दौरान गश्त और निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी की है। वहीं अक्टूबर से जून तक के पर्यटन सीजन के आंकड़े भी एक-दो दिन में सामने आने की संभावना है।

पर्यटकों को खूब भाता है मढ़ई का प्राकृतिक सौंदर्य

रिजर्व प्रबंधन के अधिकारियों से लेकर गाइड के रूप में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का व्यवहार पर्यटकों को खूब रास आता है। तभी तो कुछ पर्यटक अक्टूबर से जून के बीच कई बार मढई में जंगल सफारी का आनंद लेने पहुंचते हैं। मढ़ई की शांत वादियां, घने जंगल और वन्यजीवों की सहज मौजूदगी इसे देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल करती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

अब 1 अक्टूबर को खुलेंगे मढ़ई के गेट 

एसटीआर की क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि कोर क्षेत्र में पर्यटन बंद होने से वन्य जीव अपने नैसर्गिक जीवन का आनंद लेंगे। वे स्वतंत्र रूप से जंगल में चहलकदमी करेंगे। बारिश के दौरान उन्हें भरपूर मात्रा में खाना भी मिल जाता है और यह वन्यजीवों का प्रजनन का समय भी होता है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि कोर क्षेत्र में पर्यटन बंद होने से वन्य जीवों की सुरक्षा के लिहाज से रिजर्व प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है और बारिश के दौरान सड़कें खराब होने पर वनकर्मियों को पैदल, हाथी, बोट गश्त पर निर्भर होना पड़ता है।

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बाघों की सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस 

इस बीच वन्यप्राणियों, खासतौर से बाघों की सुरक्षा बड़ी चुनौती रहेगी। पिछले कुछ समय में बाघों का शिकार भी हुआ है। बारिश के दिनों में कोई चूक नहीं हो, इसके लिए इस बार और मजबूती से गश्त की जाएगी। वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों कर्मचारी निगरानी और गश्त करेंगे। कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जलभराव वाले क्षेत्रों में नाव से पेट्रोलिंग होगी, सभी बीटों में पैदल गश्ती तेज की जाएगी और जहां बाघों का मूवमेंट रहेगा, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। कोर क्षेत्र में बाहरी किसी भी व्यक्ति का प्रवेश नहीं रहेगा, जबकि बफर क्षेत्र में पर्यटन जारी रहेगा।

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बेहतर रही बाघों की साइटिंग

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि इस बार पर्यटकों के लिए बाघ की साइटिंग बीते साल की अपेक्षा बेहतर हुई है। विश्व के मानस पटल पर स्थापित हो चुके मढ़ई में लोग सिर्फ पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को देखने भी आते हैं। भोपाल से नजदीक होने के कारण यहां पहुंचना आसान है और पचमढ़ी भी पास होने से पर्यटक एक ही यात्रा में दोनों स्थलों का आनंद लेते हैं। घने जंगलों में बसे ग्रामीणों के विस्थापन के बाद क्षेत्र में बाघों के साथ-साथ शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो पर्यावरण संतुलन और खाद्य श्रृंखला की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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