🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में 'स्मिता' की मौत, नर हाथी कृष्णा से संघर्ष की आशंका, 6 घंटे तक चला पोस्टमार्टम

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा मौत का वास्तविक कारण
Follow on Google News
 सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में 'स्मिता' की मौत, नर हाथी कृष्णा से संघर्ष की आशंका, 6 घंटे तक चला पोस्टमार्टम
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में मादा हाथी ‘स्मिता’ की मौत हो गई

सोहागपुर। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना परिक्षेत्र में विभागीय मादा हाथी ‘स्मिता’ की मौत हो गई। करीब 46 साल की स्मिता मल्लूपुरा बीट में मृत पाई गई। उसके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि नर हाथी ‘कृष्णा’ के साथ संघर्ष के दौरान स्मिता घायल हुई होगी। हालांकि, वन विभाग ने साफ किया है कि उसकी मौत की असली वजह अभी तय नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रयोगशाला जांच के बाद ही मौत के कारण की अंतिम पुष्टि हो सकेगी। स्मिता की मौत की खबर सामने आने के बाद चूरना क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों, महावतों और स्मिता के साथ लंबे समय तक काम कर चुके लोगों में शोक का माहौल है। करीब चार दशक तक वन विभाग के साथ रहने वाली स्मिता ने कई वन्यजीव संरक्षण और गश्ती अभियानों में अपनी भूमिका निभाई थी।

6 घंटे तक चला पोस्टमार्टम

स्मिता की मौत के बाद मंगलवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में विशेषज्ञों की मौजूदगी में उसका पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान वरिष्ठ वन अधिकारी, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गुरुदत्त शर्मा और डॉ. प्रशांत देशमुख ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की। यह पूरी प्रक्रिया करीब छह घंटे तक चली। जांच के दौरान शरीर से जरूरी वैज्ञानिक नमूने भी लिए गए। इन नमूनों को सुरक्षित रखा गया है और अब इन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। वन विभाग के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रयोगशाला जांच के नतीजों के आधार पर ही यह पता चल पाएगा कि स्मिता की मौत वास्तव में किस वजह से हुई।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में मादा हाथी ‘स्मिता’ की मौत

10 अगस्त को दिखे थे चोट के निशान

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जनसंपर्क अधिकारी और सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े के अनुसार, 9 अगस्त की रात विभागीय हाथियों को चूरना परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 190 और मल्लूपुरा बीट के जंगल में छोड़ा गया था। 10 अगस्त को जब हाथी वापस लौट रहे थे, तब स्मिता के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दिए। वन विभाग की टीम ने तुरंत उसकी स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार और फर्स्ट एड दिया। उपचार के बाद स्मिता सामान्य रूप से चल-फिर रही थी। लेकिन उसी दिन शाम करीब 4 बजे उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और वह जमीन पर गिर पड़ी। वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई।

कृष्णा से भिड़ंत की जताई जा रही आशंका

स्मिता के शरीर पर मिले चोट के निशानों के बाद वन विभाग को आशंका है कि उसकी किसी दूसरे हाथी के साथ भिड़ंत हुई होगी। शुरुआती तौर पर इन चोटों को नर हाथी कृष्णा के साथ संभावित संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वन विभाग ने अभी इसे मौत का अंतिम कारण नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े के मुताबिक, नर हाथी कृष्णा को कर्नाटक से लाया गया था। उसका स्वभाव अपेक्षाकृत आक्रामक बताया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले दिनों कृष्णा की एक अन्य हाथी के साथ भी भिड़ंत हुई थी।

MP News : सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में आदिवासी पर टाइगर का अटैक, मारकर शव के पास बैठा रहा

करीब चार दशक तक चूरना की पहचान रही स्मिता

स्मिता केवल विभागीय हाथी नहीं थी, बल्कि चूरना क्षेत्र में उसकी एक अलग पहचान बन चुकी थी। वह लंबे समय से चूरना और मढ़ई क्षेत्र में वन विभाग के साथ काम कर रही थी। करीब चार दशक के अपने लंबे सेवाकाल में स्मिता ने वन विभाग के कई अभियानों में योगदान दिया। जंगल में गश्त, वन्यजीव संरक्षण और विभिन्न विभागीय अभियानों में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके साथ लंबे समय तक काम कर चुके सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर लाखन पटेल ने स्मिता को शांत और सीधी स्वभाव की हथनी बताया। अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी स्मिता की अपनी पहचान थी।

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

पोस्टमार्टम और जरूरी सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्मिता को पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसके शव का दाह और भस्मीकरण किया गया। स्मिता की अंतिम प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त नर्मदापुरम अशोक कुमार सिंह, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की उप संचालक ऋषिभा सिंह नेताम, पशु चिकित्सक और NTCA के प्रतिनिधि समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

वन विभाग ने स्मिता की मौत के मामले में जरूरी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसकी मौत किस वजह से हुई। शरीर पर मिले चोट के निशानों के कारण हाथियों के बीच संघर्ष की आशंका जरूर जताई जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के परिणामों से ही मौत की वास्तविक वजह सामने आएगी।

Published By: Garima Vishwakarma 

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

icon

Latest Posts