केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में प्रवेश व्यवस्था को लेकर मंदिर समिति नई गाइडलाइन तैयार कर रही है। गैर-सनातनियों के प्रवेश, शपथ पत्र की व्यवस्था और मोबाइल प्रतिबंध जैसे प्रस्तावों ने इस मुद्दे को चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले समय में एसओपी लागू होने के बाद धामों में दर्शन व्यवस्था में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मंदिर समिति के अनुसार, धामों की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है। इस एसओपी का उद्देश्य यह तय करना है कि केवल वही लोग मंदिर के गर्भगृह या परिसर में प्रवेश कर सकें, जिनकी सनातन धर्म में आस्था हो। इसी के तहत जब अभिनेत्री सारा अली खान के प्रवेश को लेकर सवाल किया गया, तो समिति की ओर से कहा गया कि अगर कोई गैर-सनातनी व्यक्ति दर्शन करना चाहता है, तो उसे शपथ पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि वह सनातन धर्म में आस्था रखता है।
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इस प्रस्तावित नियम को लेकर कई नेताओं के बयान भी सामने आए है। कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि-किसी भी श्रद्धालु की आस्था पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि उत्तराखंड आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र है, जहां सभी भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर शपथ पत्र की व्यवस्था लागू होती है, तो क्या यह नियम सभी धर्मों और सभी सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों पर समान रूप से लागू होगा ?।
मंदिर समिति ने धामों में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ और नियमों पर भी विचार किया है। प्रस्ताव के अनुसार, केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर परिसर से लगभग 50 से 60 मीटर की दूरी तक मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगाई जा सकती है। यह नियम केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं बल्कि मंदिर समिति के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों पर भी लागू होगा। इसके अलावा धामों में फोटोग्राफी के लिए अलग-अलग जगह तय करने की योजना है, जहां श्रद्धालु निर्धारित क्षेत्र में ही मोबाइल का उपयोग कर सकेंगे।