Sanju Devi Asian Games 2026: गोल्ड जीतकर लौटीं संजू देवी, स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर नहीं पहुंचा कोई? सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

छत्तीसगढ़ की कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी ने Asian Games 2026 में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया, लेकिन जब वह मेडल लेकर भारत लौटीं तो एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए न कोई बड़ी भीड़ थी और न ही कोई खास इंतजाम नजर आया। गले में गोल्ड मेडल और हाथ में खुद ट्रॉली बैग खींचती संजू की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गईं। भारत में अक्सर खिलाड़ियों की उपलब्धियों को एयरपोर्ट पर सम्मान के साथ सेलिब्रेट किया जाता है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को गोल्ड दिलाने वाले गैर-क्रिकेट खिलाड़ियों को भी क्या उनकी उपलब्धि के मुताबिक वैसा ही सम्मान और पहचान नहीं मिलनी चाहिए?
गले में गोल्ड, हाथ में ट्रॉली बैग... तस्वीर ने खींचा ध्यान
संजू देवी की वायरल तस्वीरों में सबसे ज्यादा ध्यान उनकी सादगी ने खींचा। देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतकर लौटने वाली खिलाड़ी के गले में पदक था, लेकिन उनके आसपास क्रिकेट खिलाड़ियों जैसा बड़ा स्वागत दिखाई नहीं दिया। यही तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का कारण बनी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के मुताबिक उतना ही सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए? हालांकि, किसी खिलाड़ी के एयरपोर्ट पर स्वागत का आकार उसकी उपलब्धि का पैमाना नहीं होता।




ईरान को हराकर भारत ने जीता कबड्डी का गोल्ड
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया। इस जीत के साथ भारत ने महिला कबड्डी में अपना चौथा एशियन गेम्स गोल्ड हासिल किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से बढ़त बनाई और दबाव के बावजूद मैच के अहम पलों में अपनी पकड़ बनाए रखी। ईरान ने दूसरे हाफ में वापसी की कोशिश की, लेकिन भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।
संजू देवी के लिए क्यों खास है यह गोल्ड?
संजू देवी छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से आती हैं। उन्होंने भारतीय महिला कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व किया। एशियन गेम्स 2026 में भारत ने ईरान को हराकर गोल्ड जीता। संजू ने टूर्नामेंट में टीम के अभियान में योगदान दिया। वह इससे पहले 2025 महिला कबड्डी वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रही हैं।
गांव से एशियन गेम्स तक पहुंचीं संजू देवी
संजू देवी की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल की कहानी नहीं है। वह कोरबा जिले के केराकछार गांव से आती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया था। बाद में उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और उन्होंने आगे की ट्रेनिंग हासिल की। बिलासपुर की महिला आवासीय कबड्डी अकादमी में उन्हें प्रशिक्षण, शिक्षा, जिम और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं मिलीं। यानी जिस खिलाड़ी की तस्वीर आज गोल्ड मेडल के साथ वायरल हो रही है, उसके पीछे वर्षों की मेहनत और संघर्ष की कहानी है।
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मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल पर दी बधाई
संजू देवी की उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनसे फोन पर बातचीत कर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता को छत्तीसगढ़ और देश के लिए गर्व का विषय बताया। मुख्यमंत्री की ओर से संजू की मेहनत और प्रदर्शन की सराहना की गई। राज्य सरकार की ओर से उन्हें सम्मान और पुरस्कार दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
असली सवाल स्वागत से आगे का है?
संजू देवी की तस्वीरों ने भले ही एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर चर्चा शुरू की हो, लेकिन इसके पीछे बड़ा सवाल भारतीय खेल व्यवस्था को लेकर है। क्या देश में अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों को समान स्तर पर पहचान, सुविधाएं और प्रोत्साहन मिल रहा है?



















