मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बाद फिल्म को दोबारा समीक्षा के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था। 17 मार्च को हुई स्क्रीनिंग के बाद बोर्ड ने फिल्म को पुनर्परीक्षा के लिए चुनाव आयोग के पास भेज दिया है।
अधिकारियों की चिंता है कि फिल्म की कहानी और राजनीतिक संदर्भ तमिलनाडु में होने वाले चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अब फिल्म को सर्टिफिकेट देने या न देने का अंतिम फैसला चुनाव आयोग के हाथ में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंसर बोर्ड के सूत्रों ने फिल्म को आयोग के पास भेजे जाने की पुष्टि की है, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी मिलने से इनकार किया गया है। यह स्थिति फिल्म की रिलीज को लेकर और ज्यादा असमंजस पैदा कर रही है।
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फिल्म की रिलीज पहले 9 जनवरी तय की गई थी, लेकिन तब से लगातार टलती आ रही है। प्रोड्यूसरों को उम्मीद थी कि फरवरी में फिल्म रिलीज हो जाएगी, लेकिन सेंसर से जुड़े मसलों के चलते ऐसा नहीं हो सका। अब तमिलनाडु में 23 अप्रैल से चुनाव होने हैं और 15 मार्च से आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। ऐसे में चुनावी माहौल फिल्म की रिलीज के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
ट्रेड सर्कल में यह माना जा रहा है कि जन नायकन 30 अप्रैल से पहले रिलीज नहीं हो पाएगी। वोटों की गिनती 4 मई को होनी है, इसलिए संभावना है कि फिल्म को चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही हरी झंडी मिल सके।