देश ने खोया एक और वीर सपूत :राजौरी में एंटी-टेरर ऑपरेशन के दौरान खाई में गिरे लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी

राजौरी। देश की सुरक्षा के लिए सीमाओं और दुर्गम इलाकों में तैनात जवान हर दिन जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करते हैं। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से ऐसी ही एक दुखद खबर सामने आई है। आतंकियों के खिलाफ चल रहे बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की मौत हो गई। वह पिछले 15 दिनों से इलाके में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ का हिस्सा थे। उनकी मौत किसी आतंकी हमले में नहीं हुई, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाते हुए उनकी जान चली गई।
क्या है ऑपरेशन शेरूवाली?
राजौरी जिले के डोरीमाल और गंभीर मुगलान क्षेत्र के घने जंगलों में सुरक्षा बल पिछले 15-16 दिनों से आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे हैं। इस अभियान को ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ नाम दिया गया है। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि, इलाके के घने जंगलों में दो से तीन पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे हुए हैं। इनमें एक शीर्ष कमांडर भी शामिल बताया जा रहा है। इन आतंकियों की तलाश के लिए सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
कैसे हुआ हादसा?
अधिकारियों के अनुसार शनिवार शाम डोरीमाल इलाके में तलाशी अभियान के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अपनी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे। क्षेत्र बेहद दुर्गम, पहाड़ी और फिसलन भरा था। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे करीब 30 मीटर गहरी खाई में जा गिरे। साथी जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। घटना के बाद उनका शव बरामद कर लिया गया और आवश्यक सैन्य प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
दुर्गम इलाके में चल रहा है सर्च ऑपरेशन
राजौरी का यह क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। यहां घने जंगल, खड़ी चट्टानें, गहरी खाइयां और खराब मौसम ऑपरेशन को और कठिन बना देते हैं। सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में ड्रोन, ट्रैकर डॉग्स और आधुनिक निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान जारी है।
ऑपरेशन की प्रमुख चुनौतियां
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चुनौती |
स्थिति |
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घने जंगल |
दृश्यता बेहद कम |
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खड़ी पहाड़ियां |
आवाजाही में खतरा |
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गहरी खाइयां |
दुर्घटना की आशंका |
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खराब मौसम |
सर्च ऑपरेशन प्रभावित |
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आतंकी गतिविधियां |
लगातार सुरक्षा खतरा |
05 असम यूनिट से जुड़े थे अधिकारी
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी भारतीय सेना की 05 असम यूनिट से जुड़े हुए थे। वे ऑपरेशन शेरूवाली में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और अपनी टीम के साथ कई दिनों से जंगलों में अभियान चला रहे थे। साथी अधिकारियों के अनुसार, वह कर्तव्यनिष्ठ, साहसी और समर्पित सैन्य अधिकारी थे। कठिन परिस्थितियों में भी वह अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने जताया शोक
भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कॉर्प्स ने कहा कि, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, खड़ी चट्टानों और चुनौतीपूर्ण मौसम में ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान अधिकारी ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्र सेवा की भावना सेना के जवानों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।
आज जम्मू में दी जाएगी श्रद्धांजलि
सेना के अधिकारियों के अनुसार लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर जम्मू एयर फोर्स स्टेशन लाया जाएगा, जहां सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपा जाएगा, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
आतंकियों की तलाश अभी भी जारी
लेफ्टिनेंट गोस्वामी की मौत के बावजूद ऑपरेशन शेरूवाली को रोका नहीं गया है। सुरक्षा बल अब भी डोरीमाल और गंभीर मुगलान बेल्ट के जंगलों में आतंकियों की तलाश में जुटे हुए हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि, संदिग्ध आतंकी अभी भी इलाके में छिपे हो सकते हैं। ऐसे में सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।











