रायपुर का इन्फ्लुएंसर बाबू खेमानी गिरफ्तार :ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का निकला मास्टरमाइंड, इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं को जोड़ता था

रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट के मास्टरमाइंड बाबू खेमानी को मुंबई से गिरफ्तार किया है। वह ‘3 STUMPS’ वेबसाइट के जरिए IPL मैचों पर सट्टा चला रहा था। देशभर में फैले इस नेटवर्क में कई लोग शामिल थे। पुलिस ने पहले भी 20 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा था। मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का निकला मास्टरमाइंड, इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं को जोड़ता था
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    रायपुर में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक बड़े इंटरस्टेट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड और खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताने वाला बाबू खेमानी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तार किया और फ्लाइट के जरिए रायपुर लाया गया है। पुलिस जल्द ही इस पूरे मामले का खुलासा करेगी।

    IPL पर सट्टा चलाने का बड़ा नेटवर्क

    जांच में सामने आया है कि, बाबू खेमानी ‘3 STUMPS’ नाम की ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट के जरिए इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) मैचों पर बड़े पैमाने पर सट्टा खिलवा रहा था। यह पूरा नेटवर्क महादेव सट्टा सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर देशभर में यूजर्स को जोड़ा गया। खेमानी खुद सामने नहीं आता था, बल्कि अलग-अलग शहरों में बैठकर पूरे नेटवर्क को कंट्रोल करता था।

    FIR के बाद फरार, मुंबई से गिरफ्तारी

    13 अप्रैल को रायपुर के गंज थाना में बाबू खेमानी के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस की और मुंबई के एक होटल में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे फ्लाइट से रायपुर लाया गया, जहां पुलिस पूरे मामले का खुलासा करेगी।

    कई शहरों में फैला सिंडिकेट

    यह सट्टा नेटवर्क केवल रायपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि मुंबई, पुणे, गोवा, नागपुर और भुवनेश्वर जैसे शहरों तक फैला हुआ था। खेमानी ने अलग-अलग शहरों में अपने लोगों को बैठाकर पैनल ऑपरेट करवाए थे। इस तरह यह एक इंटरस्टेट नेटवर्क बन गया था, जो एक संगठित सिस्टम के तहत काम कर रहा था।

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    रिश्तेदारों और दोस्तों की अहम भूमिका

    इस पूरे सिंडिकेट को चलाने के लिए बाबू खेमानी ने अपने रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों को शामिल किया था। हर व्यक्ति को अलग जिम्मेदारी दी गई थी, जैसे यूजर्स को जोड़ना, सट्टा लगवाना, पैसा कलेक्ट करना और पैनल ऑपरेट करना। इस तरह पूरा नेटवर्क एक टीम की तरह काम कर रहा था, जिससे इसका विस्तार तेजी से हुआ।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का इस्तेमाल

    सट्टा कारोबार को बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया गया। खासकर इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को आकर्षित किया जाता था। ऑनलाइन एप और वेबसाइट के माध्यम से सट्टा खिलाया जाता था, जिससे यह कारोबार तेजी से फैलता गया और पुलिस के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो गया।

    म्यूल अकाउंट से होता था ट्रांजैक्शन

    इस नेटवर्क में पैसों के लेन-देन के लिए म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता था। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिन्हें गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है। कई बार ये खाते किसी अनजान व्यक्ति के नाम पर खोले जाते हैं या फिर लोग कमीशन के बदले अपने खाते इस्तेमाल करने देते हैं। इससे ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

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    पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

    बाबू खेमानी पर यह पहली बार कार्रवाई नहीं हुई है। करीब तीन साल पहले भी रायपुर पुलिस ने उस पर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की थी और जुर्माना लगाया था। इसके बावजूद वह फिर से ऑनलाइन सट्टा कारोबार में सक्रिय हो गया और इस बार उसने बड़े स्तर पर नेटवर्क खड़ा कर लिया।

    पहले 20 से ज्यादा सटोरिए गिरफ्तार

    इस मामले में पुलिस पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। क्राइम ब्रांच ने ओडिशा और महाराष्ट्र में छापेमारी कर 20 से अधिक सटोरियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 82 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप और करीब 60 लाख रुपए के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे। पूछताछ में इन सभी ने बाबू खेमानी का नाम लिया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी।

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    दुबई कनेक्शन की जांच

    जांच एजेंसियों को शक है कि, इस सट्टा नेटवर्क के तार विदेश, खासकर दुबई से जुड़े हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि बाबू खेमानी कई बार दुबई जा चुका है और आईपीएल शुरू होने से पहले भी वह वहीं से लौटा था। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

    सिंडिकेट में बंटी हुई थीं जिम्मेदारियां

    पुलिस जांच में सामने आया है कि, इस नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका तय थी। बाबू खेमानी मास्टरमाइंड था, जबकि उसका एजेंट कमलेश देवांगन पैसे कलेक्ट करता था। इसके अलावा कई लोग पैनल ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे, जो अलग-अलग शहरों से सट्टा संचालन संभालते थे। इस तरह यह एक व्यवस्थित और संगठित नेटवर्क था।

    पुलिस कर रही मामले की जांच

    फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है और कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। डिजिटल सबूतों की जांच भी जारी है। माना जा रहा है कि, आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

     

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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