भोपाल। राजधानी की सर्द रात...घड़ी में ठीक 2 बजे... और करोंद स्थित अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा अचानक पुलिस की भारी टुकड़ी से घिर चुका था। लगभग 400 पुलिसकर्मी, दर्जनों वाहन और वायरलेस की खामोश आवाजें—पूरा इलाका मानो किसी फिल्मी क्राइम सीन में बदल गया। यह ऑपरेशन इतना गोपनीय रखा गया था कि भनक तक नहीं लगी। जैसे ही चारों दिशाओं से घेराबंदी हुई, कॉलोनी में हड़कंप मच गया।
पुलिस टीमों ने घर-घर तलाशी ली, दस्तावेजों की जांच की और संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ की। कुल 20 संदिग्धों को मौके से हिरासत में लिया गया, जबकि कुल 38 लोगों को पकड़ा गया। इनमें कई ऐसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं जो लंबे समय से फरार थे और जिन पर स्थायी वारंट जारी थे। इस दौरान 245 स्थायी वारंट, 120 गिरफ्तारी वारंट और 121 जमानती वारंट तामील हुए। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में चार जिला बदर भी हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ आरोपियों के खिलाफ दूसरे राज्यों में भी गंभीर अपराध दर्ज हैं यानी नेटवर्क सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय कनेक्शन तक फैला हुआ है।
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी कामयाबी रही शहादत की गिरफ्तारी। यह वही आरोपी है जिस पर 1 लाख 38 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी, लेकिन वह हर बार चकमा दे देता था। देर रात की इस रणनीतिक दबिश ने आखिरकार उसकी फरारी पर पूर्ण विराम लगा दिया। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि अब अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा।
सूत्र बताते हैं कि यह ऑपरेशन महज एक छापा नहीं, बल्कि संगठित अपराध और फरार वारंटियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। भोपाल पुलिस का यह एक्शन अपराध जगत के लिए सीधा संदेश है—कानून की पकड़ से बचना अब नामुमकिन है।
पूरे ऑपरेशन की कमान खुद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने संभाली। उनकी रणनीतिक योजना, गोपनीय तैयारी और सटीक क्रियान्वयन ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता में बदल दिया। अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि राजधानी में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई रियायत नहीं होगी।