मुंबई। मुंबई की सियासत में ऐतिहासिक पल दर्ज हो गया जब बृह्नमुंबई महानगर पालिका (BMC) में भाजपा का मेयर बनाने का सपना आखिरकार पूरा हो गया। BJP की रितु तावड़े को बुधवार को निर्विरोध महापौर चुन लिया गया। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि 25 वर्षों से चली आ रही शिवसेना की पकड़ के अंत का प्रतीक भी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी ने इसे और राजनीतिक वजन दे दिया। शिवसेना (शिंदे गुट) के संजय घाड़ी को उपमहापौर चुना गया, जिससे महायुति की एकजुटता का संदेश भी साफ दिखा।
53 वर्षीय रितु तावड़े का नाम बीएमसी की राजनीति में नया नहीं है। वे लंबे समय से स्थानीय प्रशासन और जनसेवा से जुड़ी रही हैं। शिक्षा समिति की अध्यक्ष और सुधार समिति की उपाध्यक्ष के रूप में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक समझ का परिचय दिया। महिला मोर्चा और महिला आर्थिक विकास महामंडल में सक्रिय भूमिका निभाने से उनकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत हुई। स्थानीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता और जमीनी संपर्क को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
227 सदस्यीय नगर निकाय चुनाव में BJP ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। सहयोगी शिवसेना (शिंदे) के 29 पार्षदों के साथ महायुति की कुल ताकत 118 तक पहुंच गई, जिसने महापौर पद की राह आसान कर दी। वहीं 1997 से BMC पर राज कर रही शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा। उसके सहयोगी मनसे को 6 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को सिर्फ 1 सीट मिली। आंकड़े साफ बताते हैं कि मुंबई की सत्ता का गणित पूरी तरह बदल चुका है।
रितु तावड़े का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। 2012 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी रणनीतिक समझ, प्रशासनिक अनुभव और पार्टी नेतृत्व का भरोसा—इन्हीं तीन स्तंभों ने उन्हें मुंबई के सर्वोच्च नगर पद तक पहुंचाया।