नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। बजट चर्चा के दौरान दिए गए उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों और आरोपों ने सदन में तीखी नोकझोंक को जन्म दिया। खास तौर पर ‘एपस्टीन फाइल’ का जिक्र होते ही माहौल और तनावपूर्ण हो गया। स्पीकर की आपत्ति के बाद राहुल गांधी ने उस मुद्दे पर आगे चर्चा न करने की बात कही, लेकिन तब तक राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो चुकी थी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में दो तरह के नेता होते हैं—एक वे जो जिम्मेदारी निभाते हैं और देश निर्माण में योगदान देते हैं, और दूसरे वे जो बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं। पुरी ने तंज कसते हुए कहा कि जब सदन में ठोस जवाब मिलता है तो कुछ लोग चर्चा अधूरी छोड़कर चले जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मजबूत नेतृत्व के कारण ही भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ रहा है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के आरोपों पर हरदीप पुरी ने विस्तार से सफाई दी। उन्होंने कहा कि नवंबर 2014 में वे एक निजी नागरिक के तौर पर अमेरिका में थे और उस दौरान लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से मुलाकात हुई थी। यह संवाद भारत में ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों से जुड़ा था। पुरी ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक डोमेन में जारी लाखों ईमेल में उनका नाम केवल कुछ बार आया है, वह भी औपचारिक संदर्भों में।
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पुरी ने बताया कि वे 2009 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहे और बाद में अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े। इंटरनेशनल पीस इंस्टिट्यूट (IPI) से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के दौरान कुछ मौकों पर एपस्टीन से मुलाकात हुई, लेकिन उसका किसी अवैध गतिविधि से संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि एपस्टीन से जुड़ी आपराधिक जांच और आरोप अलग विषय हैं, जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को नियमों के खिलाफ बताते हुए विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संसद में किसी पर गंभीर आरोप लगाने से पहले नोटिस और प्रमाण देना अनिवार्य है। रिजिजू के मुताबिक, बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ठोस सुझाव देने के बजाय निराधार आरोप लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब वित्त मंत्री जवाब देंगी तो विपक्ष को सदन में मौजूद रहकर अपने दावों को साबित करना चाहिए।
रिजिजू ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 2014 के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य पहले 2030 के बाद का बताया गया था। उनका दावा है कि मौजूदा सरकार ने इस लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया है। सरकार के अनुसार भारत अब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और आने वाले कुछ वर्षों में तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है। संसद में छिड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक गर्मी बढ़ा सकता है।