कोटा में छात्रों से बोले राहुल गांधी...भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ एक वसूली तंत्र बन गई है

कोटा। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद करते हुए शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं के जीवन और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर केंद्रित चर्चा है। राहुल गांधी ने कहा, मैं यहां आकर और आपके सामने खड़े होकर बहुत खुश और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह कोई राजनैतिक बैठक नहीं है। यह युवाओं के बारे में एक मीटिंग है। यह शाम आपके बारे में है और उन चुनौतियों के बारे में है जिनका आप हर दिन सामना करते हैं।
भारत जोड़ो यात्रा से मिले अनुभव
राहुल गांधी ने अपने कन्याकुमारी से कश्मीर तक के पैदल सफर का जिक्र करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने लाखों युवाओं से मुलाकात की। बातचीत में उन्होंने युवाओं से उनके सपनों और करियर की पसंद के बारे में पूछा। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, कुछ समय पहले मैं कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल गया था। रास्ते में लाखों युवाओं से मैं मिला था और मेरा एक ही सवाल होता था कि आप क्या करना चाहते हो? मुझे केवल 5 जवाब मिले कि हम इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, IAS और फौजी बनना चाहते हैं। इसके बाद मेरे दिमाग में सवाल उठा कि देश के युवा देश का भविष्य हैं और हमारी शिक्षा प्रणाली हमारे युवाओं को हमेशा 5 ही रास्ते क्यों दिखाती है?
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शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा के बाद उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया। उनके अनुसार सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती जा रही है, जबकि निजी शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। उन्होंने कहा, यात्रा के बाद, जब मैंने शिक्षा व्यवस्था के बारे में थोड़ा और सोचना शुरू किया तो मन में सवाल उठे कि पब्लिक सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था क्यों खत्म हो गई? प्राइवेट सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था इतनी महंगी क्यों है?

पैरेंट्स की चिंता : बच्चों के भविष्य के साथ बढ़ रहा मानसिक दबाव
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने यूपीएससी अभ्यर्थी भावना महावर के माता-पिता नरेश महावर और पार्वती महावर को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान पार्वती महावर ने बताया कि मौजूदा शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली ने छात्रों पर भारी मानसिक दबाव पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी में जुटे बच्चों की चिंता अभिभावकों को भी हर पल सताती रहती है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब उनका बेटा या बेटी देर रात तक पढ़ाई करता है, तो वे कई बार उठकर उसकी स्थिति देखने जाते हैं। यह केवल पढ़ाई की चिंता नहीं होती, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी मन में लगातार डर बना रहता है। आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में अभिभावक हमेशा इस आशंका से घिरे रहते हैं कि कहीं अत्यधिक तनाव के कारण उनका बच्चा कोई गलत निर्णय न ले ले। पार्वती महावर ने कहा कि यह समस्या केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि देश के लाखों अभिभावकों की साझा चिंता है। उन्होंने सरकार और समाज से अपील की कि छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने के लिए ठोस और स्थायी समाधान तलाशे जाएं, ताकि युवा बिना भय और तनाव के अपने सपनों को पूरा कर सकें।
छात्रों के मन में आत्महत्या का विचार नहीं आए
छात्रों में बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव को लेकर भी राहुल गांधी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, भारत की शिक्षा व्यवस्था अपने बच्चों पर दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है, दबाती है और कुचल देती है, और यह देश के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने सभी से मिलकर ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जहां किसी भी छात्र के मन में आत्महत्या जैसा विचार न आए।
नीट और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव
हाल के वर्षों में नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान कई छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का दबाव, असफलता का डर और भविष्य की चिंता युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करती है। ऐसे में छात्रों को यह समझाना आवश्यक है कि किसी परीक्षा में असफल होना जीवन का अंत नहीं है। चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना ही सफलता का सही मार्ग है।












