राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता केस:इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को किया अलग, याचिकाकर्ता की पोस्ट पर जताई नाराजगी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस केस की सुनवाई कर रहे जज सुभाष विद्यार्थी ने खुद को मामले से अलग कर लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को किया अलग, याचिकाकर्ता की पोस्ट पर जताई नाराजगी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस केस की सुनवाई कर रहे जज सुभाष विद्यार्थी ने खुद को मामले से अलग कर लिया है। सोमवार को उन्होंने यह फैसला याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट के बाद लिया।

सोशल मीडिया पोस्ट बनी वजह

दरअसल याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए इशारों में रिश्वत लेने और जेल भेजने जैसी बातें लिखीं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन पोस्ट में कोर्ट से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

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जज ने सुनवाई के दौरान इन पोस्ट्स का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई और कहा कि 'पीठ पीछे इस तरह कीचड़ उछालना और अदालत के खिलाफ टिप्पणी करना सही नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है।

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पहले FIR का आदेश, फिर बदला फैसला

इस मामले में 17 अप्रैल को जज सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच CBI से कराने का आदेश दिया था। हालांकि अगले ही दिन उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए कहा कि बिना नोटिस जारी किए ऐसा आदेश देना उचित नहीं है।

ब्रिटेन की नागरिकता का लगा है आरोप

कर्नाटक के रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के पास भारत के अलावा ब्रिटेन की नागरिकता भी है। इसी आधार पर उन्होंने FIR दर्ज कराने की मांग की थी। यह याचिका पहले MP-MLA कोर्ट से खारिज हो चुकी थी जिसके बाद मामला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में लाया गया।

पोस्ट में दी थी धमकी

याचिकाकर्ता ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि अगर 'किसी ने पैसा लिया है तो उसे वापस कर दें वरना इंटरसेप्ट की गई कॉल सार्वजनिक कर दी जाएगी और जेल जाना पड़ेगा।'

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हालांकि पोस्ट में किसी व्यक्ति या जज का नाम नहीं लिया गया लेकिन कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया।

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सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी

सुनवाई शुरू होते ही जज ने याचिकाकर्ता से कड़े सवाल किए और कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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