जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा है कि याचिकाकर्ता सिर्फ समस्या नहीं उसका समाधान भी बताएं। समाधान यदि उचित होगा, तो उसको अमल में लाने के संबंध में हम सरकार को जरूरी निर्देश जारी करेंगे। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने ये टिप्पणी गुरुवार को जबलपुर में दूषित पानी से संबंधित मामलों पर सुनवाई करते हुए कीं। बेंच ने याचिकाकर्ताओं को रिसर्च करके उचित समाधान पेश करने कहा है। अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।
गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट समर्थ सिंह बघेल ने हाईकोर्ट को पत्र भेजकर नाले के गंदे पानी से उगाई जा रही सब्जियों का मुद्दा उठाया था। मामले को संजीदगी से लेते हुए हाईकोर्ट ने न सिर्फ इस पत्र को जनहित याचिका का दर्जा दिया, बल्कि 14 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के बाद नाले के गंदे पानी से सब्जियां उगाने पर रोक लगा दी थी। इस बीच नालों के गुजर रही पानी की पाइप लाइन के मुद्दे को चुनौती देकर डेमोके्रटिक लॉयर्स फोरम और नर्मदा नदी में मिल रहे गंदे पानी के खिलाफ अधिवक्ता विनिता आहूजा ने भी जनहित याचिकाएं दाखिल कीं। इन सभी मामलों पर एकसाथ सुनवाई हो रही है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी व अधिवक्ता रविन्द्र गुप्ता ने दलीलें रखीं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि सफाई के मामले में इंदौर शहर कैसे अव्वल आया? वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने कहा कि वहां के तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने कड़े कदम उठाए थे। इस पर सीजे ने कहा कि कलेक्टर के कदमों से नहीं, वहां की जनता जागरूक हुई, इसलिए इंदौर ने मिसाल बनाई। अब जब तक जबलपुर की जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं होगा। आपने समस्याएं बताई हैं, बेहतर होगा कि सिस्टमेटिक स्टडी करके सिस्टमेटिक सोल्यूशन भी बताएं। इसके बाद ही हम सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश देंगे।