पल्लवी वाघेला
भोपाल। मप्र विधानसभा के मानसून सत्र में बोलते हुए जब मां नर्मदा जिक्र आया, तब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सम्मानपूर्वक अपने जूते उतार दिए। फिर मां नर्मदा को नमन करके आगे अपनी बात कही। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में इसका उल्लेख किया था। मां नर्मदा के लिए मंत्री प्रहलाद पटेल की अनन्य भक्ति और प्रेम जग जाहिर है। अब पटेल ने अपनी नर्मदा परिक्रमाओं को लेकर एक किताब लिखी है। इसका विमोचन 14 सितंबर को इंदौर में किया जाएगा। पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आना तय है। पटेल की किताब-'परिक्रमा' कई मायने में खास है। पहला, मौजूदा मंत्रिमंडल में प्रहलाद पटेल ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने कोई किताब लिखी है। यह किताब अध्यात्म और दर्शन पर केंद्रित है। जानकारी के मुताबिक वह पिछले 15 साल से इस किताब को लिखने को लेकर प्रयासरत थे, लेकिन अब यह संयोग बन पाया है।
मंत्री प्रहलाद पटेल की पत्नी पुष्पलता पटेल के अनुसार ‘मंत्रीजी’ ने करीब 30 साल पहले पहली बार नर्मदा परिक्रमा की थी। मंत्री पटेल की पैदल यात्राएं नशामुक्ति, नक्सलवाद और जल संरक्षण को लेकर अनवरत जारी हैं। उन्होंने परिक्रमा किताब की डमी कॉपी 28 जून को अपने जन्मदिन पर गुरु निराहार, अवधूत सिद्ध महायोगी दादा गुरुजी को समर्पित की थी। पटेल इस अभियान के तहत करीब 100 नदियों के उद्गम स्थलों तक पैदल यात्रा करके उनके संवर्धन और संरक्षण के लिए लोगों को संकल्प दिला चुके हैं। यह एक रिकॉर्ड है। इतनी नदियों के उद्गम स्थल तक कम समय में आज तक कोई नहीं पहुंचा है। यह किताब, प्रहलाद पटेल की नर्मदा परिक्रमा से उनके समग्र जीवन, विशेषकर उनके आत्मिक परिवर्तन को दुनिया के सामने लाएगी। उदाहरण के लिए नर्मदा परिक्रमा के बाद उनके भोजन और रहन-सहन में क्या बदलाव आया, इसका पुस्तक में विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में उस दौर की तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया है, जो इसे और आकर्षक और संग्रहणीय बनाती हैं।
इस पुस्तक के बारे में बताते हुए प्रदेश के मंत्री प्रदेश और देश की राजनीति के प्रमुख चेहरे प्रह्लाद पटेल ने कहा दादागुरु की प्रेरणा से नर्मदा परिक्रमा के अपने अनुभवों को किताब के जरिए साझा कर रहा हूं। इस साल मेरी नर्मदा परिक्रमा को 30 साल पूरे हो रहे हैं। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर डॉ. मोहन भागवत किताब का विमोचन करेंगे।
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