भोपाल। कूनो नेशनल पार्क में चीतों के खानों पर रोजाना 35 हजार रुपए खर्चे जा रहे और सालभर के अंदर ही ये चीते 1,27,10,870 रुपए का बकरी मीट खाते हैं। इन चीतों के लिए वैसे तो शिकार हेतु चीतल भी छोड़े जाते हैं, लेकिन चीतों को बकरी का मीट ज्यादा पसंद होता है। यह जानकारी विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब दी गई।
विधायक मुकेश मल्होत्रा के जवाब में सरकार ने बताया कि कूनो वाइल्डलाइफ डिवीजन में अभी कुल 32 चीते हैं। इन चीतों को कूनो जंगल से निकालकर ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना से लेकर राजस्थान तक भेजा जा रहा। इस दौरान हुई चर्चा में विधायक ने कहा था कि कूनो जंगल में चीतों को खाने को नहीं मिल रहा, जिस वजह से वे बाहर निकलकर शिकार कर रहे हैं और गांवों के लोगों की बकिरयों व जानवरों का शिकार कर रहे हैं। सीएम ने भी इस मामले में लिखित जवाब देते हुए यह भी बताया कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों को खाने के लिए अलग से कोई रकम नहीं दी गई थी, चीतों को हर दिन कितनी बकरियों का खाना खिलाया जाता है, इसका कोई तय मानक भी नहीं है। जरूरत के हिसाब से उन्हें मीट दिया जाता है। यह माना गया कि जंगल खुला होने से कभी-कभी चीते गांव में बकरियों-जानवरों का शिकार करते हैं।
विधायक मल्होत्रा ने दिसंबर 2025 में घाटीगांव हाईवे पर एक चीते की सड़क दुर्घटना में हुई मौत को लेकर भी सवाल किया। विधायक ने पूछा कि क्या कूनो स्टाफ और डिपार्टमेंटल ऑफिसर चीतों की भलाई और सुरक्षित रखने के लिए लापरवाह हैं?
सरकार ने लिखित जवाब में बताया कि 6 दिसंबर 2025 को हाईवे पर भटकने के बाद एक एक्सीडेंट में चीते की मौत हो गई थी। सरकार ने कहा कि लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैकिंग टीम प्रभावी ढंग से काम कर रही है और हाईवे पर हुई मौत महज एक दुर्घटना थी, इसके लिए किसी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।